फ़रिश्ते किससे बनाए गए हैं?

Published: by Farhat Khan
✅ Expert-Approved Content

फ़रिश्तों को नूर (प्रकाश) से बनाया गया है। पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) ने फ़रमाया: “फ़रिश्तों को नूर से पैदा किया गया, जिन्नों को धुएँ रहित आग से और आदम (अ.) को उस चीज़ से पैदा किया गया जिसका वर्णन तुम्हें किया गया है।” (सहीह मुस्लिम)। इसलिए फ़रिश्ते न आग से बने हैं और न मिट्टी से, बल्कि वे अल्लाह की विशेष नूरानी मख़लूक़ हैं।

विस्तृत व्याख्या

फ़रिश्तों पर ईमान लाना इस्लाम के ईमान के छह मूल स्तंभों में से एक है। वे अल्लाह की सम्मानित मख़लूक़ हैं, जो हर समय उसकी इबादत करते हैं और उसके आदेशों का बिना किसी अवज्ञा के पालन करते हैं। यद्यपि मनुष्य उन्हें सामान्य रूप से नहीं देख सकता, लेकिन उनका अस्तित्व क़ुरआन और सहीह हदीस से प्रमाणित है।

फ़रिश्तों की सृष्टि

फ़रिश्तों की सृष्टि किस चीज़ से हुई है, इसका सबसे स्पष्ट प्रमाण सहीह हदीस में मिलता है।

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया—

“फ़रिश्तों को नूर से पैदा किया गया, जिन्नों को धुएँ रहित आग से पैदा किया गया और आदम (अ.) को उस चीज़ से पैदा किया गया जिसका वर्णन तुम्हें किया गया है।”

यह हदीस स्पष्ट करती है कि फ़रिश्ते नूर (प्रकाश) से बनाए गए हैं। नूर की वास्तविक प्रकृति कैसी है, इसकी विस्तृत जानकारी क़ुरआन और सहीह हदीस में नहीं दी गई। इसलिए मुसलमान वही मानते हैं जो अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) ने बताया है।

मनुष्य, जिन्न और फ़रिश्तों की सृष्टि में अंतर

सृष्टिकिससे बनाई गई
इंसानमिट्टी
जिन्नधुएँ रहित आग
फ़रिश्तेनूर (प्रकाश)

यह अंतर अल्लाह की असीम शक्ति और उसकी सृष्टि की विविधता को दर्शाता है।

फ़रिश्तों की विशेषताएँ

क़ुरआन और सहीह हदीस के अनुसार फ़रिश्तों की कई विशेषताएँ हैं—

  • वे नूर से बनाए गए हैं।
  • वे कभी अल्लाह की अवज्ञा नहीं करते।
  • वे अत्यंत शक्तिशाली हैं।
  • अल्लाह की अनुमति से मानव रूप धारण कर सकते हैं।
  • उनके दो, तीन, चार या उससे अधिक पंख हो सकते हैं।
  • जिब्रील (अ.) को नबी (ﷺ) ने उनके वास्तविक रूप में 600 पंखों के साथ देखा।
  • वे दिन-रात अल्लाह की इबादत करते हैं और थकते नहीं।

क्या फ़रिश्ते पुरुष हैं या स्त्री?

नहीं। इस्लाम में फ़रिश्तों को पुरुष या स्त्री नहीं माना जाता। क़ुरआन ने उन लोगों का खंडन किया है जिन्होंने फ़रिश्तों को अल्लाह की बेटियाँ कहा था।

क्या फ़रिश्ते खाते-पीते हैं?

क़ुरआन और सहीह हदीस में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि फ़रिश्ते मनुष्यों की तरह भोजन या पेय ग्रहण करते हैं। वे अल्लाह की विशेष मख़लूक़ हैं और उनकी प्रकृति मनुष्यों से भिन्न है।

अल्लाह ने फ़रिश्तों को क्यों पैदा किया?

अल्लाह ने फ़रिश्तों को अनेक महत्वपूर्ण कार्यों के लिए पैदा किया है।

  • नबियों तक वही पहुँचाना।
  • इंसानों के कर्मों को लिखना।
  • अल्लाह की लगातार इबादत करना।
  • अल्लाह के आदेश से वर्षा, रोज़ी और अन्य व्यवस्थाओं का संचालन करना।
  • मोमिनों की सहायता करना।
  • मृत्यु के समय रूह क़ब्ज़ करना।
  • जन्नत और जहन्नम की निगरानी करना।

फ़रिश्तों के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

  • वे नूर से बनाए गए हैं।
  • वे कभी गुनाह नहीं करते।
  • वे हमेशा अल्लाह की आज्ञा का पालन करते हैं।
  • सामान्य परिस्थितियों में मनुष्य उन्हें नहीं देख सकता।
  • अल्लाह चाहे तो वे इंसानी रूप में प्रकट हो सकते हैं।
  • अन्य सभी मख़लूक़ की तरह वे भी अल्लाह की इच्छा से एक दिन मृत्यु का स्वाद चखेंगे और फिर दोबारा जीवित किए जाएँगे।

कुरआन का प्रमाण

सूरह फ़ातिर (35:1)

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं—

“सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो आकाशों और पृथ्वी का रचयिता है, जिसने फ़रिश्तों को संदेशवाहक बनाया, जिनके दो, तीन और चार पंख हैं।”

इस आयत से मिलने वाली शिक्षाएँ:

  • फ़रिश्ते अल्लाह की मख़लूक़ हैं।
  • उनके पंख होते हैं।
  • वे अल्लाह के आदेशों का पालन करने वाले दूत हैं।

सूरह अत-तहरीम (66:6)

अल्लाह फ़रमाते हैं—

“वे अल्लाह के किसी आदेश की अवज्ञा नहीं करते और जो आदेश दिया जाता है वही करते हैं।”

इस आयत से मिलने वाली शिक्षाएँ:

  • फ़रिश्ते कभी अवज्ञा नहीं करते।
  • वे हर आदेश का पूर्ण पालन करते हैं।

हदीस का प्रमाण

रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फ़रमाया—

“फ़रिश्तों को नूर से पैदा किया गया, जिन्नों को धुएँ रहित आग से और आदम (अ.) को उस चीज़ से पैदा किया गया जिसका वर्णन तुम्हें किया गया है।”

संदर्भ: सहीह मुस्लिम

सहीह हदीसों से यह भी प्रमाणित है कि नबी मुहम्मद (ﷺ) ने जिब्रील (अ.) को उनके वास्तविक स्वरूप में 600 पंखों के साथ देखा।

विद्वानों की राय

इमाम नववी (रह.)

उन्होंने लिखा कि सहीह मुस्लिम की यह हदीस फ़रिश्तों के नूर से बनाए जाने का स्पष्ट और प्रामाणिक प्रमाण है।

इमाम इब्न कसीर (रह.)

उन्होंने अपनी तफ़सीर में उल्लेख किया कि फ़रिश्ते अल्लाह के सम्मानित बंदे हैं, जो कभी उसकी अवज्ञा नहीं करते और हर आदेश का पालन करते हैं।

शैख़ुल इस्लाम इब्न तैमिय्याह (रह.)

उन्होंने कहा कि फ़रिश्तों के बारे में वही मानना चाहिए जो क़ुरआन और सहीह सुन्नत में प्रमाणित है तथा ग़ैब की बातों में अनुमान लगाने से बचना चाहिए।

आम गलतफ़हमियाँ

गलतफ़हमी: फ़रिश्ते आग से बनाए गए हैं।

सही उत्तर: नहीं। सहीह मुस्लिम के अनुसार फ़रिश्ते नूर से बनाए गए हैं, जबकि जिन्न धुएँ रहित आग से बनाए गए हैं।

गलतफ़हमी: फ़रिश्ते अल्लाह की अवज्ञा कर सकते हैं।

सही उत्तर: नहीं। क़ुरआन स्पष्ट रूप से बताता है कि फ़रिश्ते कभी अल्लाह की अवज्ञा नहीं करते।

गलतफ़हमी: फ़रिश्ते स्त्रियाँ हैं।

सही उत्तर: नहीं। क़ुरआन इस धारणा का स्पष्ट रूप से खंडन करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फ़रिश्ते किससे बने हैं?

फ़रिश्तों को नूर (प्रकाश) से बनाया गया है। इसका स्पष्ट प्रमाण सहीह मुस्लिम की हदीस में मिलता है।

क्या फ़रिश्तों के पंख होते हैं?

हाँ। क़ुरआन में बताया गया है कि फ़रिश्तों के दो, तीन, चार या उससे अधिक पंख होते हैं। जिब्रील (अ.) के 600 पंख होने का उल्लेख सहीह हदीस में मिलता है।

क्या फ़रिश्ते खाते हैं?

नहीं। क़ुरआन और सहीह हदीस में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि फ़रिश्ते मनुष्यों की तरह भोजन करते हैं।

क्या इंसान फ़रिश्तों को देख सकता है?

सामान्य रूप से नहीं। लेकिन अल्लाह की अनुमति से फ़रिश्ते मानव रूप में प्रकट हो सकते हैं, जैसा कि जिब्रील (अ.) कई बार हुए।

क्या फ़रिश्तों की भी मृत्यु होगी?

हाँ। फ़रिश्ते भी अल्लाह की मख़लूक़ हैं। उचित समय पर वे भी अल्लाह की इच्छा से मृत्यु का स्वाद चखेंगे और फिर क़ियामत के बाद दोबारा जीवित किए जाएँगे।

निष्कर्ष

फ़रिश्ते अल्लाह की नूरानी और सम्मानित मख़लूक़ हैं, जिन्हें नूर से बनाया गया है। वे कभी अल्लाह की अवज्ञा नहीं करते और हर समय उसके आदेशों का पालन करते हैं। फ़रिश्तों पर ईमान रखना इस्लाम के मूल विश्वासों में से एक है, जो अल्लाह की महान शक्ति, व्यवस्था और हिकमत पर ईमान को और अधिक दृढ़ बनाता है।

1 Year MEMBER
Farhat Khan is a dedicated Islamic writer and researcher specializing in Quranic exegesis (Tafseer), Hadith studies, and core Aqeedah. He is passionate about presenting authentic Islamic knowledge with precise scriptural references.

Your comment will appear immediately after submission.

Leave a Comment