हदीस इस्लाम का दूसरा प्रमुख स्रोत है, जो कुरआन के बाद मुसलमानों के लिए मार्गदर्शन का आधार है। इसलिए यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि सबसे पहले हदीसों को लिखित रूप में किसने संकलित किया। इस विषय में विद्वानों के बीच कुछ मतभेद पाए जाते हैं। कुछ लोग सहाबा के दौर की लिखित सहीफ़ाओं को पहला संकलन मानते हैं, जबकि अन्य इमाम ज़ुहरी को पहला व्यवस्थित हदीस संकलक मानते हैं। वास्तव में, इस प्रश्न का उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि “संकलन” से क्या अभिप्राय लिया जा रहा है—प्रारंभिक लेखन या व्यवस्थित ग्रंथ निर्माण।
संक्षिप्त उत्तर
पहले हदीस संकलक कौन थे, इस विषय में विद्वानों के विभिन्न मत हैं। यदि लिखित हदीसों की बात की जाए, तो सहाबा के युग में ही हदीस लिखी जाने लगी थी और हज़रत अब्दुल्लाह इब्न अम्र (रज़ि.) की “अस-सहीफ़तुस सादिक़ा” इसका प्रसिद्ध उदाहरण है। लेकिन यदि व्यवस्थित और अध्यायवार हदीस संकलन की बात की जाए, तो इमाम ज़ुहरी (रह.) को पहला व्यवस्थित हदीस संकलक माना जाता है।
विस्तृत व्याख्या
सहाबा के दौर में हदीस संकलन
हदीसों को लिखने और सुरक्षित रखने का कार्य पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) के समय से ही प्रारंभ हो गया था। कई सहाबा हदीसों को लिखकर सुरक्षित रखते थे।
अबू बकर (रज़ि.)
कुछ ऐतिहासिक रिवायतों के अनुसार हज़रत अबू बकर (रज़ि.) ने कुछ हदीसें लिखी थीं। बाद में उन्होंने अत्यधिक सावधानी के कारण उन्हें नष्ट कर दिया ताकि कोई भ्रम उत्पन्न न हो।
उमर इब्न अल-खत्ताब (रज़ि.)
हज़रत उमर (रज़ि.) ने भी हदीसों को लिखित रूप में सुरक्षित रखने पर विचार किया था। हालांकि उन्होंने इस बात की चिंता व्यक्त की कि कहीं लोग कुरआन से अधिक अन्य ग्रंथों में व्यस्त न हो जाएँ।
अब्दुल्लाह इब्न अम्र इब्न अल-आस (रज़ि.)
हदीस लेखन के क्षेत्र में उनका नाम विशेष रूप से उल्लेखनीय है। उन्होंने “अस-सहीफ़तुस सादिक़ा” नामक संग्रह तैयार किया था, जिसमें लगभग एक हजार हदीसें थीं। यह प्रारंभिक हदीस लेखन के सबसे महत्वपूर्ण उदाहरणों में से एक माना जाता है।
ताबिईन के दौर में हदीस संकलन
इमाम ज़ुहरी (रह.)
इमाम मुहम्मद इब्न मुस्लिम इब्न शिहाब अज़-ज़ुहरी (रह.) को हदीस संकलन के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है।
उमय्यद खलीफा उमर इब्न अब्दुल अज़ीज़ (रह.) ने जब देखा कि सहाबा और वरिष्ठ ताबिईन की संख्या कम होती जा रही है, तो उन्होंने हदीसों को व्यवस्थित रूप से लिखित रूप में सुरक्षित करने का आदेश दिया।
इमाम ज़ुहरी ने इस कार्य को स्वीकार किया और हदीसों को विषयवार, अध्यायवार और व्यवस्थित ढंग से संकलित किया। इसी कारण अधिकांश विद्वान उन्हें पहला व्यवस्थित हदीस संकलक मानते हैं।
अन्य प्रारंभिक संकलक
इमाम ज़ुहरी से पहले और उनके समकालीन कुछ अन्य विद्वानों ने भी हदीसें लिखी थीं, जैसे:
- अबू बकर इब्न हज़्म
- सईद इब्न मुसय्यिब
- उरवाह इब्न जुबैर
हालाँकि उनकी रचनाएँ पूर्ण और व्यवस्थित ग्रंथ के रूप में प्रसिद्ध नहीं हुईं।
मुख्य निष्कर्ष
यदि “पहला हदीस संकलक” से आशय हदीस लिखने वाले पहले व्यक्ति से है, तो सहाबा इस सम्मान के अधिकारी हैं। लेकिन यदि आशय व्यवस्थित और अध्यायवार हदीस ग्रंथ तैयार करने वाले पहले विद्वान से है, तो यह सम्मान इमाम ज़ुहरी (रह.) को दिया जाता है।
कुरआन का प्रमाण
अल्लाह तआला फरमाता है:
“यदि तुम नहीं जानते तो ज्ञान वालों से पूछ लो।”
— सूरह अन-नहल, 16:43
इस आयत से ज्ञान को सुरक्षित रखने और विद्वानों से सीखने का महत्व स्पष्ट होता है। सहाबा और ताबिईन ने इसी आदेश के अनुरूप पैगंबर (ﷺ) की सुन्नत को सुरक्षित रखने का महान कार्य किया।
हदीस का प्रमाण
रसूलुल्लाह (ﷺ) ने फरमाया:
“मैं तुम्हारे बीच दो चीज़ें छोड़कर जा रहा हूँ; जब तक तुम उन्हें मजबूती से पकड़े रहोगे, कभी गुमराह नहीं होगे—अल्लाह की किताब और मेरी सुन्नत।”
— मुवत्ता इमाम मालिक
सुन्नत को सुरक्षित रखने के लिए ही सहाबा और ताबिईन ने हदीसों को याद किया, सिखाया और लिखित रूप में संरक्षित किया।
इसी प्रकार कुछ रिवायतों में आता है कि रसूलुल्लाह (ﷺ) ने हदीस लिखने की अनुमति भी प्रदान की थी, जिससे हदीस लेखन की वैधता सिद्ध होती है।
विद्वानों की राय
इमाम इब्न हजर असकलानी
उन्होंने ‘फतहुल बारी’ में हदीस संकलन के इतिहास पर चर्चा करते हुए इमाम ज़ुहरी को पहला व्यवस्थित संकलक बताया है।
इमाम ज़हबी
उन्होंने ‘सियारु आलामिन नुबला’ में सहाबा की सहीफ़ाओं और प्रारंभिक हदीस लेखन का विस्तृत उल्लेख किया है।
डॉ. मुस्तफा अल-आज़मी
उन्होंने अपने शोध में प्रमाणित किया कि हदीस लेखन का कार्य सहाबा के युग में ही प्रारंभ हो गया था और यह दावा गलत है कि हदीसें बहुत बाद में लिखी गईं।
अल्लामा सिद्दीक हसन खान
उन्होंने ‘अब्जादुल उलूम’ में हदीस संकलन के विकास और इमाम ज़ुहरी की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है।
आम गलतफहमियाँ
गलतफहमी 1: इमाम बुखारी पहले हदीस संकलक थे
यह सही नहीं है। इमाम बुखारी तीसरी हिजरी शताब्दी में आए, जबकि उनसे पहले कई हदीस संग्रह तैयार हो चुके थे।
गलतफहमी 2: सहाबा हदीस नहीं लिखते थे
यह भी गलत है। अब्दुल्लाह इब्न अम्र (रज़ि.), अली (रज़ि.) और अन्य कई सहाबा हदीसों को लिखते और सुरक्षित रखते थे।
गलतफहमी 3: इमाम ज़ुहरी ही पहले और एकमात्र संकलक थे
वास्तव में उनसे पहले भी हदीसें लिखी गई थीं। इमाम ज़ुहरी का विशेष योगदान यह था कि उन्होंने हदीसों को व्यवस्थित रूप से अध्यायों में विभाजित कर संकलित किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
किस सहाबी ने पहले हदीस लिखी?
हज़रत अब्दुल्लाह इब्न अम्र इब्न अल-आस (रज़ि.) उन प्रमुख सहाबा में से हैं जिन्होंने हदीसों को व्यवस्थित रूप से लिखकर सुरक्षित रखा।
इमाम ज़ुहरी की संकलन विधि क्या थी?
उन्होंने हदीसों को विषयवार और अध्यायवार व्यवस्थित करके संकलित किया, जिससे बाद के मुहद्दिसों के लिए मार्ग प्रशस्त हुआ।
‘अस-सहीफ़तुस सादिक़ा’ क्या है?
यह हज़रत अब्दुल्लाह इब्न अम्र (रज़ि.) द्वारा तैयार किया गया एक प्रसिद्ध हदीस संग्रह था, जिसमें लगभग एक हजार हदीसें थीं।
इमाम ज़ुहरी को पहला संकलक क्यों कहा जाता है?
उन्हें पहला व्यवस्थित हदीस संकलक कहा जाता है क्योंकि उन्होंने हदीसों को अध्यायों और विषयों के अनुसार संकलित करके ग्रंथ के रूप में प्रस्तुत किया।
निष्कर्ष
“पहले हदीस संकलक कौन थे?” इस प्रश्न का उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि संकलन से क्या अभिप्राय लिया जा रहा है। सहाबा के दौर में हदीस लेखन प्रारंभ हो चुका था और कई सहीफ़ाएँ तैयार की गई थीं। लेकिन व्यवस्थित, अध्यायवार और व्यापक हदीस संकलन का श्रेय इमाम ज़ुहरी (रह.) को दिया जाता है। उन्होंने हदीस संरक्षण की ऐसी पद्धति स्थापित की, जिसने बाद में इमाम मालिक, इमाम बुखारी और इमाम मुस्लिम जैसे महान मुहद्दिसों के लिए मार्ग प्रशस्त किया।