कुरआन क्या है?
कुरआन अल्लाह तआला का अंतिम और पूर्ण वचन है, जो फ़रिश्ते जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के माध्यम से पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) पर अवतरित किया गया। यह मानवता के …
कुरआन अल्लाह तआला का अंतिम और पूर्ण वचन है, जो फ़रिश्ते जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के माध्यम से पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) पर अवतरित किया गया। यह मानवता के …
फ़रिश्ते अल्लाह की एक विशेष सृष्टि हैं जिन्हें नूर (प्रकाश) से बनाया गया है। वे हमेशा अल्लाह की इबादत करते हैं, उसके आदेशों का पालन करते …
दुआ और ज़िक्र इस्लाम की महत्वपूर्ण इबादतों में से हैं। दुआ अल्लाह से अपनी आवश्यकताओं, इच्छाओं और क्षमा की प्रार्थना करना है, जबकि ज़िक्र अल्लाह को …
हदीस पैग़म्बर (ﷺ) के कथनों, कर्मों, स्वीकृतियों और जीवन-व्यवहार का रिकॉर्ड है। यह कुरआन के बाद इस्लाम का दूसरा प्रमुख स्रोत माना जाता है। हदीस मुसलमानों …
‘इस्लाम’ शब्द का मुख्य अर्थ एकमात्र ईश्वर (अल्लाह) के सामने खुद को पूरी तरह समर्पित कर देना और उसकी आज्ञा का पालन करना है। इसी समर्पण …
इस्लाम की मूल नींव तीन हैं: तौहीद (अल्लाह की एकता), रिसालत (नबियों और रसूलों पर विश्वास) और आख़िरत (मृत्यु के बाद के जीवन पर विश्वास)। ये …
इस्लाम अल्लाह द्वारा मानवता के लिए भेजा गया अंतिम और पूर्ण जीवन-मार्ग है। इसका अर्थ है अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण, आज्ञाकारिता और उसकी इच्छा के …
इस्लाम पाँच मूलभूत स्तंभों पर आधारित है। ये हैं: कलिमा शहादत, नमाज़, ज़कात, रोज़ा और हज। ये पाँचों स्तंभ मुसलमान के ईमान, इबादत और जीवन-व्यवस्था की …
नमाज़ इस्लाम की दूसरी और सबसे महत्वपूर्ण शारीरिक इबादत है। यह अल्लाह की बंदगी, याद और आज्ञापालन का एक विशेष तरीका है, जिसे हर बालिग मुसलमान …
ज़कात इस्लाम का तीसरा स्तंभ है और एक अनिवार्य आर्थिक इबादत है। यह उन मुसलमानों पर फ़र्ज़ है जिनके पास निसाब के बराबर या उससे अधिक …