शांति

Published: by kishore karunik

मैं शांति चाहता हूँ
चाहता हूँ हथियार-मुक्त नीला आकाश।

चाहता हूँ शांति
उत्तर-दक्षिण,
पूरब-पश्चिम,
क्षितिज से क्षितिज तक।

जल पर, थल पर,
पहाड़, पर्वत और सुरंग में।

शांति चाहता हूँ हरियाली के वैभव में,
फूल की पंखुड़ियों में,
पेड़ की पत्तियों में।

शांति… मैं शांति चाहता हूँ।

कविता की लय में, साहित्य में,
शांति चाहता हूँ अंतर में—
मनुष्य के लिए होगा मनुष्य।

शांति चाहता हूँ हर प्राणी की।
शांति ही है मेरी राह,
शांति ही मेरा प्यार,
शांति ही मेरा जीवन-व्रत।

आशा करता हूँ शांति की,
स्वप्न देखता हूँ शांति का।

आज भी चारों ओर निराशा है,
फिर भी मैं शांति चाहता हूँ।
चाहता हूँ शांति—
सिर्फ़ शांति।

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पेशेवर लेखक और कंटेंट क्रिएटर

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