मक्की और मदानी सूरहों में क्या अंतर है?
मक्की सूरह वे हैं जो पैगंबर मुहम्मद ﷺ पर हिजरत से पहले अवतरित हुईं, जबकि मदानी सूरह वे हैं जो हिजरत के बाद अवतरित हुईं। मक्की …
मक्की सूरह वे हैं जो पैगंबर मुहम्मद ﷺ पर हिजरत से पहले अवतरित हुईं, जबकि मदानी सूरह वे हैं जो हिजरत के बाद अवतरित हुईं। मक्की …
‘इस्लाम’ शब्द का मुख्य अर्थ एकमात्र ईश्वर (अल्लाह) के सामने खुद को पूरी तरह समर्पित कर देना और उसकी आज्ञा का पालन करना है। इसी समर्पण …
अल्लाह तआला को सही रूप से जानने और उन पर पूर्ण ईमान रखने के लिए उनके गुणों (सिफात) का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। अल्लाह के गुण …
हसन हदीस सहीह हदीस के बाद विश्वसनीय हदीस की दूसरी श्रेणी है। इसकी सनद (श्रृंखला) जुड़ी हुई होती है और इसके रावी न्यायप्रिय होते हैं, लेकिन …
इमाम बुखारी ने केवल 10 वर्ष की आयु में हदीस अध्ययन शुरू कर दिया था। बचपन से ही उनकी स्मरण शक्ति असाधारण थी और वे हदीसों …
सहीह बुखारी और सहीह मुस्लिम इस्लाम की दो सबसे प्रामाणिक हदीस पुस्तकों का नाम हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से “सहीहैन” कहा जाता है। दोनों ग्रंथों में …
कुतुब अल-सित्ताह (Kutub al-Sittah) का अर्थ है “छह पुस्तकें”। यह इस्लाम की छह सबसे प्रसिद्ध और व्यापक रूप से स्वीकृत हदीस पुस्तकों का समूह है, जिनमें …
मरफू (Marfu‘), मौकूफ (Mawquf) और मक़्तू (Maqtu‘) हदीस विज्ञान (उलूम अल-हदीस) की महत्वपूर्ण शब्दावली हैं, जिनका उपयोग किसी रिवायत (Narration) के स्रोत की पहचान करने के …
जईफ (कमज़ोर) हदीस वह हदीस है जो सहीह या हसन हदीस की आवश्यक शर्तों को पूरा नहीं करती। इसकी सनद (वर्णन-श्रृंखला) में किसी प्रकार की कमजोरी, …
दुआ और ज़िक्र इस्लाम की महत्वपूर्ण इबादतों में से हैं। दुआ अल्लाह से अपनी आवश्यकताओं, इच्छाओं और क्षमा की प्रार्थना करना है, जबकि ज़िक्र अल्लाह को …
कलिमा शहादत इस्लाम की मूल गवाही है, जिसके माध्यम से एक व्यक्ति यह स्वीकार करता है कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य उपास्य नहीं है और …
इस्लाम की मूल नींव तीन हैं: तौहीद (अल्लाह की एकता), रिसालत (नबियों और रसूलों पर विश्वास) और आख़िरत (मृत्यु के बाद के जीवन पर विश्वास)। ये …