१५ मार्च, २०२६ — भारत के POSH कानून के इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव आया है। कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) संशोधन नियम, २०२६ के माध्यम से पहली बार पुरुष और ट्रांसजेंडर कर्मचारी इस कानून के तहत सुरक्षा पाएंगे। इससे पहले केवल महिला कर्मचारी ही कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का शिकार होने पर कानूनी सुरक्षा पा सकती थीं। लेकिन २०२६ का यह ऐतिहासिक संशोधन परिस्थिति को पूरी तरह बदल चुका है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के २०२५ के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों में ४५% की वृद्धि हुई है।
| विषय | संक्षिप्त उत्तर |
|---|---|
| नया क्या बदलाव हुआ है? | पुरुष और ट्रांसजेंडर कर्मचारी भी सुरक्षा पाएंगे |
| शिकायत कौन कर सकता है? | कोई भी कर्मचारी — महिला, पुरुष, ट्रांसजेंडर |
| शिकायत कहां करें? | आंतरिक शिकायत समिति (ICC) या स्थानीय समिति |
| शिकायत की समयसीमा? | घटना के ३ महीने के भीतर |
| गैर-अनुपालन पर जुर्माना? | कंपनी पर ₹५०,००० से ₹५ लाख तक जुर्माना |
POSH अधिनियम २०२६: संशोधन से पहले और बाद — पूर्ण परिवर्तन
कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, २०१३ (POSH अधिनियम) १३ वर्षों तक लागू रहा । २०२६ का संशोधन उसकी सीमाओं को दूर करता है।
संशोधन से पहले (२०१३ अधिनियम) क्या था?
| विषय | २०१३ अधिनियम का प्रावधान |
|---|---|
| संरक्षित कर्मचारी | केवल महिला कर्मचारी |
| शिकायतकर्ता | केवल महिला |
| कार्यस्थल की परिभाषा | कार्यालय, यात्रा, प्रशिक्षण केंद्र |
| पुरुषों के अधिकार | नहीं थे |
| ट्रांसजेंडर अधिकार | नहीं थे |
| ICC गठन की समयसीमा | अस्पष्ट थी |
संशोधन के बाद (२०२६ अधिनियम) क्या है?
| विषय | २०२६ संशोधन का प्रावधान |
|---|---|
| संरक्षित कर्मचारी | महिला, पुरुष और ट्रांसजेंडर कर्मचारी |
| शिकायतकर्ता | कोई भी कर्मचारी (लिंग तटस्थ) |
| कार्यस्थल की परिभाषा | कार्यालय + वर्क फ्रॉम होम + वीडियो कॉल + रिमोट वर्क (नया) |
| पुरुषों के अधिकार | पूर्ण कानूनी सुरक्षा |
| ट्रांसजेंडर अधिकार | पूर्ण कानूनी सुरक्षा |
| ICC गठन की समयसीमा | ३ महीने (अनिवार्य) |
POSH अधिनियम का दायरा: कौन सुरक्षा पाएगा?
धारा २(a) के अनुसार, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, २०१३ में “पीड़ित महिला” शब्द में किसी भी उम्र की कोई भी महिला शामिल है, चाहे वह नियोजित हो या नहीं । हालांकि, २०२६ के संशोधन ने इस परिभाषा का विस्तार किया है।
संरक्षित कर्मचारियों की सूची
निम्नलिखित व्यक्ति POSH अधिनियम के तहत सुरक्षा पाने के हकदार हैं :
- महिला कर्मचारी (कोई भी पद — स्थायी, अनुबंधित, प्रशिक्षु)
- पुरुष कर्मचारी (२०२६ में नया — स्थायी, अनुबंधित, प्रशिक्षु)
- ट्रांसजेंडर कर्मचारी (२०२६ में नया)
- आगंतुक और ग्राहक (कार्यस्थल पर आने वाला कोई भी व्यक्ति)
- घरेलू कर्मचारी (घरेलू कामों में लगे व्यक्ति)
किसके खिलाफ शिकायत की जा सकती है?
कार्यस्थल पर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ शिकायत की जा सकती है:
- सहकर्मी
- वरिष्ठ अधिकारी
- अधीनस्थ
- ग्राहक या उपभोक्ता
- अनुबंधित कर्मचारी
- आगंतुक
- तृतीय पक्ष जैसे ग्राहक, विक्रेता या सलाहकार
यौन उत्पीड़न की परिभाषा: अधिनियम के अनुसार पूरी सूची
धारा २(n) के अनुसार, यौन उत्पीड़न में निम्नलिखित में से कोई भी अवांछित कार्य शामिल है :
शारीरिक यौन उत्पीड़न
- शारीरिक स्पर्श और प्रगति
- यौन प्रस्ताव
- जबरन शारीरिक घनिष्ठता
मौखिक यौन उत्पीड़न
- अश्लील टिप्पणियाँ और ताने
- यौन संकेतात्मक प्रश्न
- अश्लील उपनामों का उपयोग
गैर-मौखिक यौन उत्पीड़न
- अश्लील हाव-भाव या संकेत
- यौन संकेतात्मक घूरना
- अश्लील चित्र या वीडियो दिखाना
डिजिटल यौन उत्पीड़न (२०२६ में नया)
- अश्लील ईमेल या संदेश भेजना
- व्यक्तिगत तस्वीरें या वीडियो बिना अनुमति शेयर करना
- वीडियो कॉल पर अश्लील व्यवहार
मुख्य कानूनी सिद्धांत (२०२६)
२०२६ तक, न्यायशास्त्र ने तीन महत्वपूर्ण सिद्धांतों को मजबूती से स्थापित कर दिया है :
- एक घटना भी यौन उत्पीड़न का गठन कर सकती है
- पीड़ित पर प्रभाव प्रतिवादी के इरादे से अधिक मायने रखता है
- लेबल या परिचितता के बजाय संदर्भ मायने रखता है
आंतरिक शिकायत समिति (ICC) — २०२६ के नए नियम
ICC क्या है?
आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee – ICC) एक अर्ध-न्यायिक वैधानिक निकाय है जिसे प्रत्येक प्रतिष्ठान को गठित करना होता है। यह समिति यौन उत्पीड़न की शिकायतों की सुनवाई और निराकरण करती है .
ICC गठन पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने अरेलियानो फर्नांडीस बनाम गोवा राज्य (सिविल अपील सं. २४८२/२०१४) में नियोक्ताओं द्वारा POSH अधिनियम के खराब कार्यान्वयन पर सवाल उठाए हैं और प्रभावी कार्यान्वयन के लिए निर्देश जारी किए हैं . अदालत ने १० से अधिक कर्मचारियों वाले सभी कार्यस्थलों में आंतरिक समितियों और जिला स्तर पर स्थानीय समितियों के गठन का निर्देश दिया है .
ICC गठन नियम (२०२६ संशोधन के अनुसार)
| ICC सदस्य का प्रकार | संख्या | उन्हें कौन होना चाहिए? |
|---|---|---|
| पीठासीन अधिकारी | १ व्यक्ति | महिला कर्मचारी (वरिष्ठ पद) |
| सदस्य | २ व्यक्ति | कर्मचारियों में से चुने गए (महिला और पुरुष दोनों) |
| एनजीओ सदस्य | १ व्यक्ति | यौन उत्पीड़न कार्य में अनुभवी एनजीओ प्रतिनिधि |
| ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि | १ व्यक्ति (वैकल्पिक) | २०२६ में नया |
महत्वपूर्ण: १० या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक प्रतिष्ठान को अनिवार्य रूप से ICC गठित करना होगा . अधिनियम लागू होने के ३ महीने के भीतर ICC का गठन किया जाना चाहिए। यदि ICC नहीं है, तो जिला अधिकारी के तहत स्थानीय समिति के पास अधिकार क्षेत्र है .
SHe-Box पोर्टल: केंद्रीकृत ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन प्रणाली
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स (SHe-Box) पोर्टल लॉन्च किया है, जो एक परिवर्तनकारी डिजिटल गवर्नेंस पहल है .
SHe-Box की मुख्य विशेषताएं
- नियोक्ताओं द्वारा गठित समितियों की जानकारी का केंद्रीकृत भंडार
- महिलाओं के लिए ऑनलाइन शिकायत पंजीकरण
- सार्वजनिक रूप से सुलभ पोर्टल
- दिल्ली, महाराष्ट्र और तेलंगाना सहित कई राज्यों में नियोक्ताओं के लिए अनिवार्य पंजीकरण
SHe-Box पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिनांक ३ दिसंबर, २०२४ के आदेश के माध्यम से निर्देश दिया कि प्रत्येक राज्य के मुख्य सचिव जिला अधिकारियों को निर्देशित करेंगे कि वे समितियों के गठन के संबंध में सर्वेक्षण करें और SHe-Box पोर्टल पर विवरण अपलोड करें .
वर्तमान स्थिति: ९१,२५० से अधिक सरकारी विभागों/कार्यालयों ने पोर्टल पर ऑनबोर्ड किया है, जिनमें से ३६,७७५ ने अपने IC विवरण अपडेट किए हैं .
कंपनियों के लिए नई प्रकटीकरण आवश्यकताएँ
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने कंपनियों पर कुछ नई प्रकटीकरण आवश्यकताएं लागू की हैं, जिसमें कंपनी के निदेशक मंडल को कंपनी के POSH अधिनियम के अनुपालन के संबंध में विशिष्ट विवरण प्रकट करने की आवश्यकता होती है .
आवश्यक प्रकटीकरण
नियोक्ताओं को कंपनी रजिस्ट्रार (RoC) को निम्नलिखित विवरण जमा करने होंगे:
- पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी को प्राप्त यौन उत्पीड़न शिकायतों की संख्या
- पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान निपटाई गई यौन उत्पीड़न शिकायतों की संख्या
- ९० दिनों से अधिक लंबित यौन उत्पीड़न शिकायतों की संख्या
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय: डॉ. सोहैल मलिक बनाम भारत संघ (२०२५)
एक महत्वपूर्ण निर्णय में जिसने सरकारी संस्थानों में यौन उत्पीड़न शिकायतों को संभालने के तरीके को नया आकार दिया, सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित महिला के कार्यस्थल पर गठित ICC के अधिकार क्षेत्र को बरकरार रखा, भले ही आरोपी कर्मचारी एक अलग विभाग में कार्यरत हो .
मामले का नाम: डॉ. सोहैल मलिक बनाम भारत संघ एवं अन्य (सिविल अपील सं. ४०४/२०२४)
निर्णय तिथि: २०२५ INSC १४१५
मुख्य निर्णय
| निर्णय | विवरण |
|---|---|
| निर्णय १ | ICC कार्यवाही पीड़ित महिला के कार्यस्थल पर शुरू की जा सकती है, भले ही आरोपी किसी अन्य विभाग से संबंधित हो |
| निर्णय २ | ICC की रिपोर्ट एक प्रारंभिक तथ्य-खोज दस्तावेज है, जिस पर आरोपी के नियोक्ता को कार्रवाई करनी होगी |
| निर्णय ३ | आरोपी बाद में अनुशासनात्मक कार्यवाही को चुनौती दे सकता है, लेकिन जांच करने वाले ICC के अधिकार क्षेत्र को नहीं |
अदालत की टिप्पणियाँ
अदालत ने कहा कि धारा २(o) के तहत “कार्यस्थल” शब्द को जानबूझकर एक व्यापक परिभाषा दी गई है जिसमें कोई भी स्थान शामिल है जहां एक कर्मचारी रोजगार के दौरान जाता है .
यौन उत्पीड़न शिकायत प्रक्रिया — चरणबद्ध गाइड
चरण १: शिकायत दर्ज करें
शिकायत किससे करें:
- प्रतिष्ठान की आंतरिक शिकायत समिति (ICC)
- यदि ICC नहीं है, तो स्थानीय समिति (जिला अधिकारी)
शिकायत कैसे करें:
- लिखित शिकायत (अंग्रेजी, हिंदी या किसी भी भारतीय भाषा में)
- ईमेल या भौतिक प्रति
- गुमनाम शिकायत की अनुमति है (लेकिन जांच मुश्किल हो सकती है)
शिकायत दाखिल करने की समयसीमा: घटना के ३ महीने के भीतर।
चरण २: सबूत इकट्ठा करें
यौन उत्पीड़न के सबूत इकट्ठा करना महत्वपूर्ण है:
- घटना की तारीख, समय और स्थान लिखें
- गवाहों के नाम और संपर्क जानकारी
- ईमेल, चैट, एसएमएस के स्क्रीनशॉट
- वॉयस रिकॉर्डिंग (भारत में एकपक्षीय सहमति से रिकॉर्डिंग कानूनी है)
- मेडिकल रिपोर्ट (यदि शारीरिक उत्पीड़न हुआ हो)
चरण ३: जांच प्रक्रिया
ICC इस प्रक्रिया का पालन करेगा :
| चरण | समयसीमा | कार्रवाई |
|---|---|---|
| चरण १ | ७ दिन के भीतर | सबूत इकट्ठा करना शुरू करें |
| चरण २ | १४ दिन के भीतर | दोनों पक्षों के बयान सुनें |
| चरण ३ | ९० दिन (अधिकतम) | जांच पूरी करें |
| चरण ४ | जांच के बाद | ICC प्रतिष्ठान को रिपोर्ट जमा करता है |
| चरण ५ | ६० दिन के भीतर | प्रतिष्ठान अंतिम निर्णय लेता है |
चरण ४: निराकरण और सजा
यदि शिकायत साबित हो जाती है, तो ICC निम्नलिखित में से कोई भी सजा की सिफारिश कर सकता है:
| सजा का प्रकार | विवरण |
|---|---|
| लिखित चेतावनी | पहली बार के मामूली अपराधों के लिए |
| वेतन कटौती | निर्दिष्ट अवधि के लिए वेतन में कटौती |
| पदोन्नति स्थगन | निर्दिष्ट समय के लिए पदोन्नति अवरुद्ध |
| कार्य से निलंबन | निर्दिष्ट अवधि के लिए कार्य से निलंबित |
| सेवा से बर्खास्तगी | गंभीर अपराधों के लिए |
| पुलिस FIR अनुशंसा | आपराधिक मामले के लिए सिफारिश |
अंतरिम राहत और समझौता — महत्वपूर्ण अंतर
२०२६ तक, यह स्थापित हो चुका है कि अंतरिम राहत और समझौता असाधारण उपकरण बने हुए हैं, डिफ़ॉल्ट तंत्र नहीं .
मुख्य स्पष्टीकरण
| पहलू | नियम |
|---|---|
| अंतरिम राहत अनुरोध | पीड़ित महिला के अनुरोध की आवश्यकता होती है |
| समझौता | केवल पीड़ित महिला के अनुरोध पर, जांच शुरू होने से पहले |
| मौद्रिक समझौता | समझौते के दौरान स्पष्ट रूप से निषिद्ध |
| शिकायतकर्ताओं पर दबाव | अनुपालन विफलता के रूप में मान्यता प्राप्त, व्यावहारिकता नहीं |
दुर्भावनापूर्ण शिकायत दावे — कानून क्या कहता है
२०२६ तक, यह स्थापित हो चुका है कि :
| सिद्धांत | स्पष्टीकरण |
|---|---|
| अप्रमाणित ≠ असत्य | एक अप्रमाणित शिकायत झूठी शिकायत नहीं है |
| दुर्भावना के लिए सबूत चाहिए | दुर्भावना के लिए जानबूझकर झूठ की आवश्यकता होती है, जो सबूत के माध्यम से सिद्ध हो |
| आकस्मिक आह्वान जोखिम | दुर्भावनापूर्ण शिकायत प्रावधानों को आकस्मिक रूप से आह्वान करने वाले संगठन अक्सर अधिक कानूनी जोखिम पैदा करते हैं |
प्रतिशोध — २०२६ में नई कठोर सजा
२०२६ के संशोधन ने प्रतिशोध को नए सिरे से परिभाषित किया है। २०२६ में, प्रतिशोध को तेजी से एक स्वतंत्र शासन विफलता के रूप में माना जाता है .
प्रतिशोध क्या है?
यदि शिकायत दर्ज करने के बाद शिकायतकर्ता के खिलाफ निम्नलिखित में से कोई भी कार्रवाई की जाती है:
- बर्खास्तगी या छंटनी
- पदावनति या स्थानांतरण
- वेतन में कटौती
- मानसिक उत्पीड़न या डराना-धमकाना
- कार्यस्थल पर अलग-थलग करना
- अन्य प्रतिकूल कार्रवाई
प्रतिशोध के लिए सजा
| अपराध | सजा |
|---|---|
| प्रतिशोधात्मक कार्रवाई करना | अतिरिक्त ₹२५,००० जुर्माना |
| गोपनीयता का उल्लंघन | अनुपालन विफलता संकेतक |
| बार-बार अपराध | बर्खास्तगी + ₹५०,००० जुर्माना |
नियोक्ता की जिम्मेदारियाँ और दंड
नियोक्ता के कर्तव्य
२०२६ तक, POSH अधिनियम नियोक्ता पर एक गैर-हस्तांतरणीय वैधानिक कर्तव्य लगाता है :
- यौन उत्पीड़न को रोकना
- कानूनी रूप से वैध उपचार तंत्र प्रदान करना
- प्रक्रियात्मक निष्पक्षता सुनिश्चित करना
- कार्यस्थल पर गरिमा की रक्षा करना
- रिपोर्टिंग और नियामक आवश्यकताओं का अनुपालन करना
नियोक्ताओं के लिए वैधानिक आवश्यकताएँ
प्रत्येक नियोक्ता को निम्नलिखित करना होगा:
- POSH नीति बनाना और कर्मचारियों को सूचित करना
- ICC गठित करना (यदि १०+ कर्मचारी हों)
- नियमित जागरूकता प्रशिक्षण प्रदान करना
- वार्षिक ICC रिपोर्ट जिला अधिकारी को जमा करना
- SHe-Box पोर्टल पर पंजीकरण करना (कई राज्यों में अनिवार्य)
- शिकायतकर्ता और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
दंड की सूची
| अपराध | जुर्माना |
|---|---|
| ICC गठित करने में विफलता | ₹५०,००० से ₹१ लाख |
| वार्षिक रिपोर्ट जमा करने में विफलता | ₹२५,००० से ₹५०,००० |
| कोई POSH नीति नहीं | ₹२५,००० जुर्माना |
| प्रतिशोधात्मक कार्रवाई करना | अतिरिक्त ₹२५,००० |
| बार-बार अपराध | ₹२ लाख तक + लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश |
POSH अधिनियम के तहत पुरुष और ट्रांसजेंडर अधिकार — २०२६ नए परिवर्धन
पुरुष कर्मचारियों के अधिकार
२०२६ के संशोधन से पहले, पुरुष कर्मचारियों के पास यौन उत्पीड़न का शिकार होने पर कोई कानूनी सुरक्षा नहीं थी। अब:
- पुरुष ICC में शिकायत दर्ज कर सकते हैं
- ICC में पुरुष सदस्य शामिल हो सकते हैं
- पुरुष कर्मचारियों के लिए अलग सुरक्षा उपाय
ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के अधिकार
- ट्रांसजेंडर कर्मचारी ICC में शिकायत दर्ज कर सकते हैं
- ICC पर ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि का प्रावधान (वैकल्पिक)
- ट्रांसजेंडर-अनुकूल जांच प्रक्रिया
२०२६ में कार्यस्थल की परिभाषा: कोविड के बाद की वास्तविकता
२०२६ में प्रवेश करते हुए सबसे लगातार POSH भ्रम “कार्यस्थल” की परिभाषा बनी हुई है। POSH अधिनियम जानबूझकर एक संकीर्ण, स्थान-आधारित परिभाषा से बचता है। इसके बजाय, यह एक रोजगार संबंध परीक्षण अपनाता है .
२०२६ में, कार्यस्थल में स्पष्ट रूप से शामिल है :
- भौतिक कार्यालय
- दूरस्थ और हाइब्रिड कार्य वातावरण
- कार्य के लिए उपयोग किए जाने वाले डिजिटल सहयोग प्लेटफॉर्म
- नियोक्ता द्वारा आयोजित ऑफसाइट और सम्मेलन
- कार्य-संबंधी यात्रा, आवास और परिवहन
- ग्राहक, विक्रेता और तृतीय पक्ष परिसर
यदि ICC उपलब्ध नहीं है तो मदद कहां लें
यदि आपके प्रतिष्ठान में कोई ICC नहीं है (जो कि १०+ कर्मचारी होने पर अवैध है) , तो आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं:
| संगठन | संपर्क | अधिकार क्षेत्र |
|---|---|---|
| स्थानीय समिति | जिला अधिकारी | ICC के बिना सभी कार्यस्थल |
| राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) | २४×७ महिला हेल्पलाइन | देशव्यापी |
| राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) | ऑनलाइन शिकायत पोर्टल | मानवाधिकार उल्लंघन |
मुफ्त कानूनी टेम्पलेट — यौन उत्पीड़न शिकायत पत्र
नीचे दिए गए टेम्पलेट का उपयोग करें (ब्रैकेट वाले अनुभागों में अपना विवरण भरें):
दिनांक: [दिनांक]
प्राप्तकर्ता,
पीठासीन अधिकारी
आंतरिक शिकायत समिति (ICC)
[प्रतिष्ठान का नाम]
[प्रतिष्ठान का पता]
विषय: POSH अधिनियम, २०१३ (२०२६ संशोधित) के तहत यौन उत्पीड़न की शिकायत
महोदय/महोदया,
मैं, [आपका नाम], [पद], [प्रतिष्ठान का नाम] में कार्यरत, यह शिकायत दर्ज कर रहा/रही हूं।
१. आरोपी का नाम और पद: [नाम और पद]
२. घटना(ओं) का विवरण (तारीख, समय, स्थान):
[विस्तृत विवरण दें]
पहली घटना: [तारीख और समय]
अंतिम घटना: [तारीख और समय]
३. यौन उत्पीड़न के प्रकार (जो लागू हो उस पर टिक करें):
[ ] शारीरिक उत्पीड़न
[ ] मौखिक उत्पीड़न
[ ] गैर-मौखिक उत्पीड़न
[ ] डिजिटल उत्पीड़न (२०२६ में नया)
४. गवाह(ओं) के नाम और संपर्क (यदि कोई हों):
[नाम और संपर्क]
५. संलग्न सबूत:
[ ] स्क्रीनशॉट
[ ] वॉयस रिकॉर्डिंग
[ ] ईमेल
[ ] अन्य
मैं समिति से निष्पक्ष और समय पर जांच का अनुरोध करता/करती हूं।
भवदीय,
[आपके हस्ताक्षर]
[आपका नाम]
[आपकी संपर्क जानकारी]
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न १: क्या पुरुष कर्मचारी POSH अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, २०२६ के संशोधन के बाद, पुरुष कर्मचारी यौन उत्पीड़न का शिकार होने पर ICC में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह POSH अधिनियम में सबसे बड़ा बदलाव है। कानून अब लिंग तटस्थ है .
प्रश्न २: शिकायत दर्ज करने की समयसीमा क्या है?
उत्तर: शिकायत घटना के ३ महीने के भीतर दर्ज की जानी चाहिए। ICC पर्याप्त कारण बताने पर अतिरिक्त ३ महीने का विस्तार कर सकता है।
प्रश्न ३: क्या मैं गुमनाम शिकायत दर्ज कर सकता/सकती हूं?
उत्तर: हाँ, गुमनाम शिकायत की अनुमति है। हालांकि, गुमनाम शिकायतों की जांच करना मुश्किल हो सकता है क्योंकि ICC गवाह या सबूत नहीं जुटा सकता। फिर भी, ICC गुमनाम शिकायतों को गंभीरता से लेगा .
प्रश्न ४: यदि मेरे प्रतिष्ठान में कोई ICC नहीं है तो मैं शिकायत कहां दर्ज करूं?
उत्तर: यदि प्रतिष्ठान में कोई ICC नहीं है (जो कि १०+ कर्मचारी होने पर अवैध है), तो आप जिला अधिकारी के नियंत्रण वाली स्थानीय समिति में शिकायत दर्ज कर सकते हैं . आप राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) से भी संपर्क कर सकते हैं।
प्रश्न ५: क्या शिकायत दर्ज करने के लिए मुझे नौकरी से निकाला जा सकता है?
उत्तर: नहीं, यह प्रतिशोध के अंतर्गत आता है, जो २०२६ के संशोधन के तहत सख्त वर्जित है . यदि आपको निकाला जाता है, तो आप अतिरिक्त मुआवजा और बहाली का दावा कर सकते हैं। २०२६ में, प्रतिशोध को तेजी से एक स्वतंत्र शासन विफलता के रूप में माना जाता है।
प्रश्न ६: ICC के सदस्य कौन होते हैं?
उत्तर: ICC में एक पीठासीन अधिकारी (एक महिला वरिष्ठ अधिकारी), कम से कम २ कर्मचारी प्रतिनिधि (कर्मचारियों में से चुने गए), एक एनजीओ प्रतिनिधि और (वैकल्पिक रूप से) एक ट्रांसजेंडर प्रतिनिधि होते हैं। पीठासीन अधिकारी एक महिला होनी चाहिए। १० या अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक नियोक्ता को ICC गठित करना होगा .
प्रश्न ७: SHe-Box पोर्टल क्या है?
उत्तर: SHe-Box (यौन उत्पीड़न इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रशासित एक केंद्रीकृत ऑनलाइन शिकायत प्रबंधन और निगरानी प्रणाली है . दिल्ली, महाराष्ट्र और तेलंगाना सहित कई राज्यों ने पहले ही नियोक्ताओं के लिए SHe-Box पोर्टल पर अपने ICC को पंजीकृत करना अनिवार्य कर दिया है .
प्रश्न ८: क्या एक घटना POSH अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न का गठन करने के लिए पर्याप्त है?
उत्तर: हाँ। एक घटना POSH अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न का गठन कर सकती है यदि यह यौन प्रकृति के अवांछित आचरण के वैधानिक मानदंड को पूरा करती है . कानून क्विड प्रो क्वो उत्पीड़न और शत्रुतापूर्ण कार्य वातावरण निर्माण दोनों को मान्यता देता है।
प्रश्न ९: सुप्रीम कोर्ट POSH अधिनियम के अधिकार क्षेत्र के बारे में क्या कहता है?
उत्तर: डॉ. सोहैल मलिक बनाम भारत संघ (२०२५) में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिलाएं अपने कार्यस्थल पर POSH शिकायत दर्ज कर सकती हैं, भले ही आरोपी अन्यत्र काम करता हो। ICC की रिपोर्ट एक प्रारंभिक तथ्य-खोज दस्तावेज है, जिस पर आरोपी के नियोक्ता को कार्रवाई करनी होगी .
प्रश्न १०: यौन उत्पीड़न का निर्धारण करने में इरादा मायने रखता है?
उत्तर: POSH अधिनियम प्रतिवादी के इरादे की तुलना में पीड़ित महिला पर आचरण के प्रभाव को प्राथमिकता देता है। यदि आचरण अवांछित और यौन प्रकृति का है तो इरादे की कमी या हास्य के दावे यौन उत्पीड़न को नकारते नहीं हैं .
प्रश्न ११: POSH अधिनियम के तहत दुर्भावनापूर्ण शिकायत क्या है?
उत्तर: दुर्भावनापूर्ण शिकायत के लिए जानबूझकर झूठ के सबूत की आवश्यकता होती है। केवल आरोपों को साबित करने में असमर्थता POSH अधिनियम की धारा १४ के तहत दुर्भावनापूर्ण शिकायत का गठन नहीं करती है . दुर्भावनापूर्ण शिकायत प्रावधानों को आकस्मिक रूप से आह्वान करने वाले संगठन अक्सर अधिक कानूनी जोखिम पैदा करते हैं।
प्रश्न १२: क्या POSH प्रशिक्षण अनुपालन के लिए पर्याप्त है?
उत्तर: नहीं। अकेले POSH प्रशिक्षण पर्याप्त नहीं है। अनुपालन के लिए वैध IC गठन, कानूनी जांच प्रक्रियाएं, दस्तावेजीकरण, रिपोर्टिंग और प्रशिक्षण से परे वैधानिक दायित्वों का पालन आवश्यक है। २०२६ में, POSH अनुपालन को एक शासन खुफिया कार्य के रूप में देखा जाना चाहिए .
निष्कर्ष
POSH अधिनियम का २०२६ का संशोधन भारत के कार्यस्थल इतिहास में एक मील का पत्थर है। पहली बार पुरुष और ट्रांसजेंडर कर्मचारी यौन उत्पीड़न का शिकार होने पर कानूनी सुरक्षा प्राप्त कर रहे हैं। डिजिटल यौन उत्पीड़न को मान्यता देना एक समयोपयोगी कदम है। SHe-Box पोर्टल का लॉन्च , ICC के अधिकार क्षेत्र पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण , और कंपनियों के लिए नई प्रकटीकरण आवश्यकताएं — सभी अधिक मजबूत कार्यान्वयन ढांचे की ओर संकेत करते हैं।
यदि आप यौन उत्पीड़न के शिकार हैं, तो चुप न रहें — आज ही कदम उठाएं। सबूत इकट्ठा करें, ICC में शिकायत दर्ज करें और कानूनी सुरक्षा लें। याद रखें, यौन उत्पीड़न शारीरिक, मौखिक, गैर-मौखिक या डिजिटल हो सकता है — आपको इसे सहन करने की आवश्यकता नहीं है।
इस गाइड को अपने एचआर विभाग, सहकर्मियों और मित्रों के साथ साझा करें। जागरूकता यौन उत्पीड़न के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।
सन्दर्भ
- भारत सरकार का विधि और न्याय मंत्रालय — आधिकारिक वेबसाइट
- कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, २०१३ — इंडिया कोड
- SHe-Box पोर्टल — महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
- प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) — भारत सरकार की प्रेस विज्ञप्तियाँ
- भारत का सुप्रीम कोर्ट — आधिकारिक वेबसाइट
- डॉ. सोहैल मलिक बनाम भारत संघ (सिविल अपील सं. ४०४/२०२४)
- राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) — आधिकारिक वेबसाइट
- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) — आधिकारिक वेबसाइट
- कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय — आधिकारिक वेबसाइट
अस्वीकरण
यह आर्टिकल केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और यह कोई कानूनी सलाह नहीं है। प्रकाशन तिथि (मई २०२६) के बाद कानून, नियम और न्यायिक व्याख्याएं बदल सकती हैं। अपनी विशिष्ट स्थिति के लिए कानूनी सलाह लेने के लिए, कृपया भारत के बार काउंसिल में पंजीकृत किसी योग्य अधिवक्ता से परामर्श करें या उपयुक्त अदालत में आवेदन दायर करें। लेखक और प्रकाशक इस सामग्री के आधार पर किए गए किसी भी कार्य के लिए कोई दायित्व नहीं लेते हैं।
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