ज़कात क्या है? किसे देनी चाहिए?
ज़कात इस्लाम का तीसरा स्तंभ है और एक अनिवार्य आर्थिक इबादत है। यह उन मुसलमानों पर फ़र्ज़ है जिनके पास निसाब के बराबर या उससे अधिक …
ज़कात इस्लाम का तीसरा स्तंभ है और एक अनिवार्य आर्थिक इबादत है। यह उन मुसलमानों पर फ़र्ज़ है जिनके पास निसाब के बराबर या उससे अधिक …
इमाम मुस्लिम (रहमतुल्लाहि अलैहि) इस्लामी इतिहास के महानतम मुहद्दिसों में से एक हैं। उनका पूरा नाम अबुल हुसैन मुस्लिम इब्न हज्जाज अल-कुशैरी अन-निशापुरी है। वह प्रसिद्ध …
फ़िक़्ह या इस्लामी विधिशास्त्र इस्लाम की एक मौलिक शाखा है। यह कुरआन और सुन्नत के प्रकाश में मुसलमानों के दैनिक जीवन, इबादत, लेन-देन और पारिवारिक मामलों …
जिब्रील (अ.) अल्लाह के सबसे महान एवं प्रमुख फ़रिश्तों में से एक हैं। उनका मुख्य कार्य अल्लाह की वही (प्रकाशना) नबियों तक पहुँचाना था। कुरआन में …
कुतुब अल-सित्ताह (अरबी: الكتب الستة) हदीस की छह सर्वाधिक प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित पुस्तकों का समूह है। इस्लामी विद्वानों के अनुसार ये ग्रंथ कुरआन के बाद सुन्नत …
हदीस इस्लाम का दूसरा प्रमुख स्रोत है, जो कुरआन के बाद मुसलमानों के लिए मार्गदर्शन का आधार है। इसलिए यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि सबसे पहले …
इमाम ज़ुहरी (मुहम्मद इब्न मुस्लिम इब्न शिहाब अज़-ज़ुहरी, मृ. 124 हिजरी) हदीसशास्त्र के महान पथप्रदर्शक, प्रतिष्ठित ताबिई और प्रारंभिक हदीस संकलन आंदोलन के अग्रणी विद्वान थे। …
इमाम अबू अब्दुल्लाह मुहम्मद इब्न इस्माइल अल-बुखारी (194–256 हिजरी / 810–870 ई.) इस्लाम के महान मुहद्दिस, हदीस विज्ञान के अग्रणी विद्वान और प्रसिद्ध ग्रंथ सहीह अल-बुखारी …
सहीह हदीस वह हदीस है जिसकी सनद (रावियों की श्रृंखला) पूरी तरह जुड़ी हुई हो, सभी रावी विश्वसनीय, न्यायप्रिय और मजबूत स्मरणशक्ति वाले हों, तथा हदीस …
पवित्र कुरआन का सबसे लंबा सूरह सूरह अल-बकराह (सूरह नंबर 2) है। इसमें कुल 286 आयतें हैं और यह लगभग ढाई पारे (जुज़) में फैला हुआ …
‘इस्लाम’ शब्द का मुख्य अर्थ एकमात्र ईश्वर (अल्लाह) के सामने खुद को पूरी तरह समर्पित कर देना और उसकी आज्ञा का पालन करना है। इसी समर्पण …
इस्लाम की मूल नींव तीन हैं: तौहीद (अल्लाह की एकता), रिसालत (नबियों और रसूलों पर विश्वास) और आख़िरत (मृत्यु के बाद के जीवन पर विश्वास)। ये …