जिब्रील (अ.) कौन हैं?

प्रकाशित: द्वारा Farhat Khan
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जिब्रील (अ.) अल्लाह के सबसे महान एवं प्रमुख फ़रिश्तों में से एक हैं। उनका मुख्य कार्य अल्लाह की वही (प्रकाशना) नबियों तक पहुँचाना था। कुरआन में उन्हें “रूहुल अमीन” (विश्वसनीय आत्मा) और “रूहुल कुदुस” (पवित्र आत्मा) कहा गया है। उन्होंने लगभग 23 वर्षों तक नबी मुहम्मद (ﷺ) के पास कुरआन की वही पहुँचाई।

विस्तृत व्याख्या

जिब्रील (अ.) इस्लाम में सबसे सम्मानित फ़रिश्तों में से एक हैं। अल्लाह तआला ने उन्हें अपनी वही नबियों और रसूलों तक पहुँचाने की महान ज़िम्मेदारी सौंपी। पवित्र कुरआन के अवतरण से लेकर अनेक महत्वपूर्ण घटनाओं तक उनका उल्लेख मिलता है। जिब्रील (अ.) के बारे में सही जानकारी रखना इस्लामी अक़ीदे (आस्था) का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जिब्रील (अ.) कौन हैं?

जिब्रील (अ.) अल्लाह द्वारा नूर (प्रकाश) से पैदा किए गए फ़रिश्तों में से एक हैं। सहीह हदीस के अनुसार सभी फ़रिश्ते नूर से बनाए गए हैं। वे अल्लाह की अवज्ञा नहीं करते, बल्कि जो आदेश दिया जाता है उसका पूर्ण रूप से पालन करते हैं। अल्लाह ने उन्हें वही पहुँचाने के लिए चुना, इसलिए उनका दर्जा फ़रिश्तों में अत्यंत ऊँचा है।

जिब्रील (अ.) की मुख्य ज़िम्मेदारियाँ

जिब्रील (अ.) का सबसे बड़ा कार्य अल्लाह की वही को नबियों तक पहुँचाना था। इसके अतिरिक्त उन्होंने अल्लाह के आदेश से अनेक महत्वपूर्ण कार्य भी किए।

उनकी प्रमुख ज़िम्मेदारियाँ:

  • नबियों और रसूलों तक वही पहुँचाना।
  • नबी मुहम्मद (ﷺ) पर कुरआन का अवतरण कराना।
  • अल्लाह के विशेष संदेश पहुँचाना।
  • अल्लाह के आदेश से मोमिनों की सहायता करना।
  • रमज़ान में नबी (ﷺ) के साथ कुरआन का पुनरावलोकन (मुराजआ) करना।
  • “हदीस-ए-जिब्रील” के माध्यम से सहाबा को इस्लाम, ईमान और इहसान की शिक्षा देना।

कुरआन में जिब्रील (अ.) के नाम

कुरआन में जिब्रील (अ.) को विभिन्न सम्मानजनक नामों से उल्लेखित किया गया है।

  • जिब्रील (جبريل) — उनका प्रसिद्ध नाम।
  • रूहुल अमीन (روح الأمين) — विश्वसनीय आत्मा।
  • रूहुल कुदुस (روح القدس) — पवित्र आत्मा।

ये नाम उनकी पवित्रता, विश्वसनीयता और वही पहुँचाने की महान ज़िम्मेदारी को दर्शाते हैं।

नबी मुहम्मद (ﷺ) के पास वही कैसे आई?

जब नबी मुहम्मद (ﷺ) हिरा की गुफा में इबादत कर रहे थे, तब जिब्रील (अ.) पहली वही लेकर आए और कहा:

“पढ़ो अपने पालनहार के नाम से जिसने पैदा किया।”

(सूरह अल-अलक 96:1)

इसके बाद लगभग 23 वर्षों तक वे समय-समय पर कुरआन की आयतें लेकर आते रहे।

जिब्रील (अ.) कितनी बार नबी (ﷺ) के पास आए?

सहीह हदीसों में उनकी कुल संख्या का उल्लेख नहीं मिलता। इसलिए कोई निश्चित संख्या बताना सही नहीं है। इतना निश्चित है कि वे लगभग 23 वर्षों तक अनेक अवसरों पर नबी (ﷺ) के पास वही और अन्य अल्लाह के आदेश लेकर आते रहे।

क्या जिब्रील (अ.) की मृत्यु होगी?

हाँ। जिब्रील (अ.) भी अल्लाह की बनाई हुई मख़लूक़ हैं। इस्लामी मान्यता के अनुसार क़ियामत के महान घटनाक्रम में, जब अल्लाह चाहेगा, तब सभी जीवित प्राणियों की तरह फ़रिश्तों की भी मृत्यु होगी। बाद में अल्लाह उन्हें फिर से जीवित करेंगे। हालाँकि कुरआन या सहीह हदीस में जिब्रील (अ.) की मृत्यु का समय या क्रम स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं किया गया है, इसलिए इस विषय में उससे अधिक कुछ कहना उचित नहीं।

मनुष्यों और जिब्रील (अ.) में क्या अंतर है?

  • मनुष्य मिट्टी से बनाए गए हैं, जबकि फ़रिश्ते नूर से बनाए गए हैं।
  • मनुष्यों को इच्छा और परीक्षा दी गई है, जबकि फ़रिश्ते केवल अल्लाह के आदेश का पालन करते हैं।
  • मनुष्य पाप कर सकते हैं, लेकिन फ़रिश्ते अल्लाह की अवज्ञा नहीं करते।
  • मनुष्य खाते-पीते और विवाह करते हैं, जबकि फ़रिश्तों के बारे में ऐसा वर्णित नहीं है।
  • दोनों ही अल्लाह की बनाई हुई मख़लूक़ हैं और अल्लाह के अधीन हैं।

जिब्रील (अ.) से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

  • सृष्टि: अल्लाह ने उन्हें नूर से पैदा किया।
  • पद: फ़रिश्तों में अत्यंत सम्मानित।
  • मुख्य कार्य: वही पहुँचाना।
  • कुरआन में उपाधियाँ: रूहुल अमीन, रूहुल कुदुस।
  • नबी (ﷺ) के साथ संबंध: लगभग 23 वर्षों तक वही पहुँचाई।
  • मृत्यु: अल्लाह की इच्छा से होगी, क्योंकि वे भी अल्लाह की बनाई हुई मख़लूक़ हैं।
  • पुनर्जीवन: क़ियामत के बाद अल्लाह उन्हें पुनः जीवित करेंगे।

कुरआन का प्रमाण

अल्लाह तआला फरमाते हैं:

“कह दीजिए, जो जिब्रील का शत्रु है, तो जान ले कि उसी ने अल्लाह की अनुमति से इसे आपके दिल पर उतारा है।”

(सूरह अल-बक़रह 2:97)

एक अन्य स्थान पर अल्लाह ने फरमाया:

“निश्चय ही यह एक सम्मानित दूत का कथन है, जो अत्यंत शक्तिशाली है और अर्श के मालिक के यहाँ बड़ा सम्मान रखता है।”

(सूरह अत-तकवीर 81:19-21)

हदीस का प्रमाण

हज़रत उमर (रज़ि.) से वर्णित प्रसिद्ध हदीस-ए-जिब्रील में जिब्रील (अ.) मनुष्य के रूप में नबी मुहम्मद (ﷺ) के पास आए और इस्लाम, ईमान तथा इहसान के बारे में प्रश्न किए। बाद में नबी (ﷺ) ने बताया कि वे जिब्रील थे, जो लोगों को उनका दीन सिखाने आए थे।

(सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम)

आम गलतफहमियाँ

क्या जिब्रील (अ.) केवल नबी मुहम्मद (ﷺ) के पास आए थे?

नहीं। वे आदम (अ.) से लेकर अनेक नबियों और रसूलों तक अल्लाह की वही पहुँचाते रहे।

क्या जिब्रील (अ.) आज भी वही लेकर आते हैं?

नहीं। नबी मुहम्मद (ﷺ) अंतिम नबी हैं। उनके बाद वही का सिलसिला समाप्त हो चुका है।

क्या जिब्रील (अ.) अमर हैं?

नहीं। वे अल्लाह की बनाई हुई मख़लूक़ हैं। अल्लाह जब चाहेगा, उनकी भी मृत्यु होगी और फिर अल्लाह उन्हें दोबारा जीवित करेगा।

निष्कर्ष

जिब्रील (अ.) अल्लाह के सबसे महान फ़रिश्तों में से एक हैं। उन्होंने नबियों तक अल्लाह की वही पहुँचाने का महान दायित्व निभाया और विशेष रूप से नबी मुहम्मद (ﷺ) पर पवित्र कुरआन का अवतरण कराया। उनका जीवन, उनकी ज़िम्मेदारियाँ और उनका उच्च स्थान इस्लामी आस्था का महत्वपूर्ण भाग हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिब्रील (अ.) का मुख्य कार्य क्या था?

उनका मुख्य कार्य अल्लाह की वही को नबियों और रसूलों तक पहुँचाना था।

जिब्रील (अ.) को “रूहुल अमीन” क्यों कहा जाता है?

क्योंकि उन्होंने अल्लाह की वही को पूर्ण विश्वसनीयता के साथ बिना किसी परिवर्तन के नबियों तक पहुँचाया।

जिब्रील (अ.) कितनी बार नबी (ﷺ) के पास आए?

सहीह हदीसों में उनकी कुल संख्या नहीं बताई गई। वे लगभग 23 वर्षों तक अनेक अवसरों पर नबी (ﷺ) के पास आते रहे।

क्या जिब्रील (अ.) की मृत्यु होगी?

हाँ। वे भी अल्लाह की बनाई हुई मख़लूक़ हैं। अल्लाह जब चाहेगा उनकी भी मृत्यु होगी और क़ियामत के बाद उन्हें पुनः जीवित किया जाएगा।

जिब्रील (अ.) नूर से बनाए गए थे?

हाँ। सहीह हदीस के अनुसार सभी फ़रिश्तों की तरह जिब्रील (अ.) को भी नूर से पैदा किया गया।

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Farhat Khan

फरहात खान एक समर्पित इस्लामी लेखक और शोधकर्ता हैं, जो मुख्य रूप से उलूमुल कुरान (तफसीर), हदीस और शुद्ध अकीदा पर काम करते हैं। प्रामाणिक इस्लामी ज्ञान को सही स्रोतों के साथ सरल भाषा में प्रस्तुत करना उनका मुख्य उद्देश्य है।

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