पवित्र कुरआन में सजदा तिलावत की कुल 15 आयतें मानी जाती हैं। जब कोई मुसलमान इन आयतों को पढ़ता या सुनता है, तो उसके लिए सजदा करना सुन्नत और अत्यंत पुण्य का कार्य है। हनफ़ी माज़हब के अनुसार सजदा वाली आयतों की संख्या 14 है, जबकि शाफ़ई और हंबली विद्वानों के अनुसार 15 आयतें हैं।
विस्तृत व्याख्या
सजदा तिलावत उन विशेष आयतों पर किया जाता है जिनमें अल्लाह तआला के सामने सजदा करने का उल्लेख या आदेश मिलता है। इन आयतों को पढ़ने या सुनने पर सजदा करना पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) की सुन्नत है।
कुरआन की सजदा वाली आयतें निम्नलिखित हैं:
- सूरह अल-आराफ (7:206)
- सूरह अर-रअद (13:15)
- सूरह अन-नहल (16:49-50)
- सूरह बनी इस्राईल (17:107-109)
- सूरह मरयम (19:58)
- सूरह अल-हज्ज (22:18)
- सूरह अल-हज्ज (22:77)
- सूरह अल-फुरकान (25:60)
- सूरह अन-नम्ल (27:25-26)
- सूरह अस-सजदाह (32:15)
- सूरह साद (38:24)
- सूरह हा-मीम सजदाह / फुस्सिलत (41:37-38)
- सूरह अन-नज्म (53:62)
- सूरह अल-इंशिकाक (84:21)
- सूरह अल-अलक (96:19)
हनफ़ी विद्वान सूरह अल-हज्ज की दूसरी सजदा वाली आयत (22:77) को सजदा तिलावत में शामिल नहीं करते, इसलिए उनके अनुसार कुल संख्या 14 है।
सजदा तिलावत करने का तरीका यह है कि आयत पढ़ने या सुनने के बाद “अल्लाहु अकबर” कहकर एक सजदा किया जाए। सजदे में सामान्य तस्बीह और दुआ पढ़ी जा सकती है। इसके बाद “अल्लाहु अकबर” कहते हुए उठ जाना पर्याप्त है।
कुरआन का प्रमाण
अल्लाह तआला फरमाता है:
“निश्चय ही जो लोग तुम्हारे रब के पास हैं, वे उसकी इबादत से घमंड नहीं करते, उसकी तस्बीह करते हैं और उसी को सजदा करते हैं।”
(सूरह अल-आराफ 7:206)
एक अन्य स्थान पर अल्लाह तआला फरमाता है:
“तो अल्लाह को सजदा करो और उसकी इबादत करो।”
(सूरह अन-नज्म 53:62)
और फरमाता है:
“हरगिज़ नहीं! तुम सजदा करो और अपने रब के निकट हो जाओ।”
(सूरह अल-अलक 96:19)
ये आयतें सजदे के महत्व और अल्लाह के सामने विनम्रता प्रदर्शित करने की शिक्षा देती हैं।
हदीस का प्रमाण
हज़रत अब्दुल्लाह इब्न उमर (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (ﷺ) जब सजदा वाली आयत पढ़ते थे, तो स्वयं सजदा करते और सहाबा भी आपके साथ सजदा करते थे।
सहीह बुखारी में वर्णित है कि कभी-कभी सजदा करने वालों की संख्या इतनी अधिक होती थी कि लोगों को सजदा करने के लिए स्थान ढूँढना कठिन हो जाता था।
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से वर्णित है कि नबी (ﷺ) ने सूरह अन-नज्म और सूरह अल-इंशिकाक की सजदा वाली आयतों पर सजदा किया।
विद्वानों की राय
इमाम अबू हनीफ़ा (रह.) के अनुसार सजदा तिलावत की आयतें 14 हैं और सजदा करना वाजिब के निकट महत्वपूर्ण अमल है।
इमाम शाफ़ई (रह.) और इमाम अहमद इब्न हंबल (रह.) के अनुसार सजदा वाली आयतें 15 हैं, जिनमें सूरह अल-हज्ज की दोनों आयतें शामिल हैं।
इमाम मालिक (रह.) के अनुसार सजदा वाली आयतों की संख्या 11 मानी गई है, क्योंकि उन्होंने कुछ आयतों को सजदा तिलावत में शामिल नहीं किया।
सभी विद्वानों का इस बात पर मतैक्य है कि सजदा तिलावत अल्लाह की महानता के प्रति विनम्रता और आज्ञाकारिता का प्रतीक है।
आम गलतफहमियाँ
क्या सजदा तिलावत फ़र्ज़ है?
नहीं। अधिकांश विद्वानों के अनुसार यह सुन्नत या मुस्तहब है। हालांकि हनफ़ी विद्वान इसे अत्यधिक महत्वपूर्ण अमल मानते हैं।
क्या महिलाओं के लिए अलग नियम है?
नहीं। सजदा तिलावत के नियम पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए समान हैं।
क्या सजदा तिलावत के लिए वुज़ू आवश्यक है?
अधिकांश फ़क़ीह वुज़ू को बेहतर और पसंदीदा मानते हैं। कुछ विद्वान बिना वुज़ू भी सजदा तिलावत को वैध मानते हैं, विशेष परिस्थितियों में।
क्या केवल सुनने से भी सजदा करना चाहिए?
यदि सजदा वाली आयत ध्यानपूर्वक सुनी जाए, तो सजदा करना अनुशंसित है।
प्रायः पूछे जाने वाले प्रश्न
तिलावत का सजदा क्या है?
कुरआन की सजदा वाली आयत पढ़ने या सुनने पर किया जाने वाला विशेष सजदा तिलावत कहलाता है।
कुरआन में कितनी सूरह हैं?
पवित्र कुरआन में कुल 114 सूरह हैं।
कुरआन में कितनी आयतें हैं?
प्रसिद्ध गणना के अनुसार कुरआन में 6,236 आयतें हैं।
सजदा तिलावaत की दुआ क्या है?
सजदे में सामान्य तस्बीह “सुब्हाना रब्बियाल अ’ला” पढ़ी जा सकती है। अन्य मस्नून दुआएँ भी पढ़ी जा सकती हैं।
सजदा तिलावत और नमाज़ के सजदे में क्या अंतर है?
दोनों में सजदा समान है, लेकिन सजदा तिलावत एक विशेष आयत के कारण किया जाता है जबकि नमाज़ का सजदा नमाज़ का अनिवार्य हिस्सा है।
निष्कर्ष
कुरआन की सजदा वाली आयतें अल्लाह के प्रति विनम्रता, आज्ञाकारिता और समर्पण का प्रतीक हैं। इन आयतों को पढ़ने या सुनने पर सजदा करना पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) की सुन्नत है। सजदा तिलावत मुसलमान को अल्लाह के और अधिक निकट लाता है तथा उसके हृदय में नम्रता और श्रद्धा उत्पन्न करता है।
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