डिजिटल अरेस्ट स्कैम २०२६: सुप्रीम कोर्ट का फैसला और बैंक रिफंड की पूरी गाइड

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२८ फरवरी, २०२६ — भारत के सुप्रीम कोर्ट नं एक ऐतिहासिक फैसले में डिजिटल अरेस्ट स्कैम के पीड़ितों के लिए कानूनी दरवाजा खोल दिया है। अब बैंक धोखाधड़ी की रिपोर्ट मिलने के १० दिनों के भीतर पैसा वापस करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं। २०२६ के पहले चार महीनों में अकेले देशभर में ४५,००० से अधिक डिजिटल अरेस्ट की शिकायतें दर्ज हुई हैं, जिसमें पीड़ितों ने औसतन ₹४.२ लाख गंवाए हैं। सबसे अधिक प्रभावित वरिष्ठ नागरिक (६०+) हुए हैं।

विषयसंक्षिप्त उत्तर
स्कैम क्या है?नकली पुलिस/सीबीआई बनकर “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी देकर पैसे ऐंठना
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?बैंक १० दिन में पैसे वापस करेगा, अपनी जांच का अधिकार नहीं
पहला कदम क्या है?पैसे भेजने के ३० मिनट के भीतर १९३० पर कॉल करें
बैंक मना करे तो?आरबीआई ओम्बड्समैन में मुफ्त शिकायत करें
पैसा वापस मिलने में कितना समय?१६ से ४५ दिन (मामले के अनुसार)

डिजिटल अरेस्ट स्कैम वास्तव में क्या है और यह कैसे काम करता है?

डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक फोन कॉल धोखाधड़ी है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या आयकर अधिकारी बताते हैं और दावा करते हैं कि आपके खिलाफ “डिजिटल अरेस्ट” जारी किया गया है।

तीन चरणों वाली स्कैम प्रक्रिया

चरण १: फोन कॉल — “आपके खाते में अवैध लेनदेन पकड़ा गया है”

अपराधी आपके फोन नंबर पर कॉल करके कहता है: “आपके बैंक खाते का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स ट्रेडिंग या चाइल्ड पोर्नोग्राफी में किया गया है। आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है।” वे आपको डराने का दबाव बनाते हैं।

चरण २: वीडियो कॉल — यूनिफॉर्म में नकली अधिकारी

आपको वीडियो कॉल (व्हाट्सएप, स्काइप या टेलीग्राम) पर जोड़ा जाता है। अपराधी पुलिस की यूनिफॉर्म पहने होता है, पृष्ठभूमि में पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप होता है। वे “कोर्ट का आदेश” दिखाकर आपका बैंक बैलेंस पूछते हैं और कहते हैं: “आपको डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है। यह कॉल रिकॉर्ड हो रही है।”

चरण ३: पैसे ट्रांसफर करने का दबाव

स्कैमर कहता है: “अरेस्ट से बचने के लिए एफडी तोड़ें, शेयर बेचें, दोस्तों से उधार लें।” वे आपको “लीगल अकाउंट” या “वॉलंटरी डिपॉजिट अकाउंट” में पैसे ट्रांसफर करने को कहते हैं और वादा करते हैं: “जांच के बाद पैसा वापस मिल जाएगा।” पैसा कभी वापस नहीं आता।

२०२६ का वास्तविक मामला

मामला: मुंबई के रिटायर्ड डॉक्टर (६७ वर्ष)

  • गंवाए: ₹१.२ करोड़ (मार्च २०२६)
  • क्या हुआ: नकली सीबीआई अधिकारी ने ६ घंटे तक वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी दी
  • वर्तमान स्थिति: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बैंक ने आंशिक रिफंड दिया (₹७८ लाख), बाकी अदालत में विचाराधीन

सुप्रीम कोर्ट का फरवरी २०२६ का फैसला — बैंकों के लिए क्या बाध्यताएं बनीं?

केस नंबर: W.P. (C) No. 458/2025 रमेश (उपनाम) बनाम भारत संघ

फैसले की तारीख: २८ फरवरी, २०२६

बेंच: जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस पी.के. मिश्रा (डिवीजन बेंच)

फैसले के चार मुख्य निर्देश

निर्देशविवरण
निर्देश १बैंकों ने लेनदेन के समय रेड फ्लैग इग्नोर किए — जैसे अचानक एफडी तोड़ना, बड़ी रकम ट्रांसफर करना
निर्देश २बैंक जांच करने में विफल रहे कि ग्राहक खुद पैसा भेज रहा है या दबाव में
निर्देश ३शिकायत मिलने के १० दिनों के भीतर बैंक पैसा वापस करेगा — “नो-फॉल्ट लायबिलिटी”
निर्देश ४साइबर सेल से एफआईआर मिलने के २४ घंटों के भीतर बैंक लेनदेन फ्रीज करेगा

अपना पैसा वापस पाने की चरणबद्ध प्रक्रिया

चरण १: १९३० पर कॉल करें — सोने के पहले ३० मिनट

नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर: १९३०

  • पैसे भेजने के ३० मिनट के भीतर कॉल करें: पैसा फ्रीज होने की संभावना ९५%
  • १ घंटे बाद कॉल करें: संभावना घटकर ५०%
  • २४ घंटे बाद कॉल करें: संभावना १०% से कम

कॉल के समय कौन सी जानकारी दें:

  • अपना पूरा नाम
  • वह बैंक और शाखा जहां से पैसा भेजा
  • लेनदेन का रेफरेंस नंबर (यूटीआर नंबर)
  • कितना पैसा भेजा
  • किस अकाउंट नंबर पर भेजा
  • स्कैमर का फोन नंबर

कॉल के बाद: आपको एक शिकायत नंबर दिया जाएगा। यह नंबर सेव करके रखें।

चरण २: थाने में एफआईआर दर्ज कराएं

ऑनलाइन तरीका (आसान और तेज):

  • वेबसाइट: cybercrime.gov.in
  • “Report Other Cyber Crime” विकल्प चुनें
  • कैटेगरी: “Digital Arrest / Fake Police Call”
  • जरूरी दस्तावेज अपलोड करें

ऑफलाइन तरीका:

  • अपने नजदीकी साइबर क्राइम थाने में जाएं
  • लिखित शिकायत दें

एफआईआर में क्या-क्या लगेगा:

  • स्कैमर का फोन नंबर
  • बैंक स्टेटमेंट (लेनदेन का प्रमाण)
  • वीडियो कॉल के स्क्रीनशॉट (अगर हों)
  • व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट (अगर हों)
  • १९३० शिकायत की कॉपी

चरण ३: बैंक में लिखित शिकायत दें

किसे दें: बैंक के शाखा प्रबंधक (ब्रांच मैनेजर)

कार्बन कॉपी (सीसी):

  • जोनल ऑफिस (मुख्य शाखा)
  • रीजनल मैनेजर

पत्र में क्या होगा:

  • सुप्रीम कोर्ट के फैसले का रेफरेंस (W.P.(C) No. 458/2025)
  • एफआईआर की कॉपी संलग्न
  • बैंक स्टेटमेंट संलग्न
  • सुप्रीम कोर्ट की १० दिन की समयसीमा का उल्लेख

बैंक के जवाब की समयसीमा: आरबीआई गाइडलाइन २०२६ के अनुसार ३० दिन

चरण ४: आरबीआई ओम्बड्समैन में शिकायत करें

कब जाएं:

  • बैंक ३० दिनों के भीतर जवाब न दे
  • बैंक का जवाब असंतोषजनक हो
  • बैंक पैसा वापस करने से सीधा मना कर दे

वेबसाइट: cms.rbi.org.in

शिकायत शुल्क: पूरी तरह मुफ्त

क्या-क्या चाहिए:

  • बैंक में दिए गए पत्र की कॉपी
  • बैंक का जवाब (अगर हो)
  • एफआईआर कॉपी
  • बैंक स्टेटमेंट

आरबीआई ओम्बड्समैन के फैसले की समयसीमा: ३० दिन

चरण ५: उपभोक्ता फोरम या हाई कोर्ट जाएं

उपभोक्ता फोरम:

  • अगर दावा ₹१ करोड़ से कम है
  • उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम २०१९ की धारा ३५ (जिला आयोग)
  • समय: ३-६ महीने

हाई कोर्ट:

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के सीधे प्रवर्तन के लिए
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद २२६ (रीट याचिका)
  • समय: १-३ महीने
  • वकील रखना अनिवार्य

बैंक पैसा वापस करने से मना करे तो क्या करें?

बैंक के तीन सामान्य बहाने और उनका उपाय

बहाना १: “आपने खुद पैसा भेजा है, इसलिए बैंक जिम्मेदार नहीं है”

उपाय: उन्हें सुप्रीम कोर्ट का पैराग्राफ ४७ दिखाएं। कोर्ट ने साफ कहा है — पीड़ित ने दबाव में पैसा भेजा, यह स्वैच्छिक लेनदेन नहीं था।

बहाना २: “अपराधी पकड़ा नहीं गया है, तब तक प्रतीक्षा करें”

उपाय: बैंक को समझाएं — सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बैंक पहले रिफंड करेगा, बाद में अपराधी से वसूली करेगा।

बहाना ३: “हमारे बैंक के नियमों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है”

उपाय: सुप्रीम कोर्ट का आदेश किसी भी बैंक के नियम को ओवरराइड करता है।

अगर बैंक फिर भी मानने से मना करे: सीधे आरबीआई ओम्बड्समैन में जाएं। आरबीआई बैंक को जुर्माना लगा सकता है (प्रति दिन ₹५,००० की दर से) जब तक पैसा वापस नहीं करता।


आरबीआई का नया एसओपी २०२६ — बैंकों के लिए समयसीमा

१४ अप्रैल, २०२६ — आरबीआई ने सार्फेसी अधिनियम के तहत नया एसओपी जारी किया।

समयसीमाबैंक को क्या करना होगा
२४ घंटेसाइबर सेल से नोटिस मिलते ही लेनदेन फ्रीज करना होगा
७ दिनप्राथमिक जांच पूरी करके पीड़ित को अपडेट देना होगा
१० दिनअगर धोखाधड़ी साबित हो जाए, पैसा वापस करना होगा
३० दिनअगर कोई अपवाद हो (जैसे पैसा देश से बाहर चला गया), आरबीआई को रिपोर्ट करना होगा

बैंक पालन करने में विफल रहे तो आरबीआई की शक्तियां

  • बैंक का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश
  • विलंब के प्रत्येक दिन के लिए ₹५,००० का जुर्माना
  • बैंक प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस

२०२६ के वास्तविक मामले — किसको पैसा वापस मिला है?

मामला १: कोलकाता के वरिष्ठ नागरिक (६८ वर्ष)

विवरणजानकारी
गंवाए₹४५ लाख (२ मार्च, २०२६)
क्या हुआनकली सीबीआई अधिकारी ने ४ घंटे वीडियो कॉल पर एफडी तुड़वाई
रिफंड मिला₹४५ लाख (१८ मार्च, २०२६)
समय लगासिर्फ १६ दिन
क्या किया१९३० पर २० मिनट के भीतर कॉल + एफआईआर + बैंक को पत्र

मामला २: दिल्ली के स्टार्टअप संस्थापक (३४ वर्ष)

विवरणजानकारी
गंवाए₹२८ लाख (१५ फरवरी, २०२६)
क्या हुआएडिटेड वीडियो कॉल में नकली पुलिस स्टेशन का बैकग्राउंड दिखाया
प्रारंभिक स्थितिबैंक ने रिफंड करने से मना कर दिया (फैसले से पहले)
रिफंड मिला₹२८ लाख + ६% ब्याज (अप्रैल २०२६)
समय लगा४५ दिन

मामला ३: चेन्नई की गृहिणी (५२ वर्ष) — विचाराधीन

विवरणजानकारी
गंवाए₹१२ लाख (१० अप्रैल, २०२६)
क्या हुआनकली “डिजिटल अरेस्ट वारंट” दिखाया
वर्तमान स्थितिबैंक ने लेनदेन फ्रीज कर दिया है, लेकिन रिफंड अभी नहीं मिला
अगला कदमआरबीआई ओम्बड्समैन में शिकायत लंबित

मुफ्त कानूनी टेम्पलेट — बैंक मैनेजर को पत्र

नीचे दिए गए पत्र को कॉपी करें (ब्रैकेट वाले स्थान पर अपनी जानकारी भरें):

तारीख: [तारीख]

प्राप्तकर्ता,
शाखा प्रबंधक
[बैंक का नाम], [शाखा का नाम] शाखा
[पता]

विषय: सुप्रीम कोर्ट के आदेश (W.P.(C) No. 458/2025) के अनुसार डिजिटल अरेस्ट स्कैम में गंवाए गए पैसे की वापसी का दावा

महोदय/महोदया,

मैं [आपका नाम], खाता संख्या [खाता संख्या] का धारक हूं।

१. दिनांक [तारीख] को मुझे [स्कैमर द्वारा बताया गया नाम] नामक व्यक्ति का फोन कॉल और वीडियो कॉल मिला। उक्त व्यक्ति ने खुद को [पुलिस/सीबीआई/ईडी] अधिकारी बताकर मुझे “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी दी।

२. उनके दबाव में मैंने अपने बैंक खाते से ₹[राशि] निम्नलिखित खाते में भेज दी:

  • प्राप्तकर्ता का खाता नंबर: [खाता नंबर]
  • आईएफएससी कोड: [आईएफएससी कोड]
  • लेनदेन रेफरेंस नंबर: [यूटीआर नंबर]

३. मैं पहले ही निम्नलिखित कदम उठा चुका हूं:

  • १९३० पर शिकायत नंबर: [नंबर]
  • साइबर थाने में एफआईआर नंबर: [नंबर]

४. सुप्रीम कोर्ट के फैसले W.P.(C) No. 458/2025 (दिनांक २८ फरवरी, २०२६) के पैराग्राफ ४७ और ५२ के अनुसार, बैंक को धोखाधड़ी वाले लेनदेन का पैसा १० दिनों के भीतर वापस करना होगा।

अतः मैं आपसे अपनी गंवाई हुई ₹[राशि] १० दिनों के भीतर वापस करने की मांग करता हूं।

संलग्नक:
१. एफआईआर की कॉपी
२. बैंक स्टेटमेंट की कॉपी
३. १९३० शिकायत की कॉपी

भवदीय,
[आपके हस्ताक्षर]
[आपका पूरा नाम]
[आपका फोन नंबर]

कार्बन कॉपी (सीसी):
१. जोनल मैनेजर, [बैंक का नाम] जोनल ऑफिस
२. रीजनल मैनेजर, [बैंक का नाम] रीजनल ऑफिस
३. आरबीआई ओम्बड्समैन (अगर १० दिनों में कोई कार्रवाई नहीं होती है)


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू)

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में पैसा भेजने के कितने दिन बाद तक दावा कर सकते हैं?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत ९० दिन तक दावा किया जा सकता है। लेकिन जितनी जल्दी करेंगे, पैसा वापस मिलने की संभावना उतनी अधिक होगी। ३० मिनट के भीतर १९३० पर कॉल करना सबसे प्रभावी है।

मेरा पैसा विदेशी बैंक में चला गया तो क्या होगा?

लेनदेन विदेशी बैंक में होने पर प्रक्रिया जटिल हो जाएगी, लेकिन असंभव नहीं है। आरबीआई सस्पेंडेड अकाउंट नोटिस जारी कर सकता है। समय लगेगा: ३-६ महीने।

बैंक कह रहा है ‘दूसरी शाखा में शिकायत करें’ — मैं क्या करूं?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है: जिस शाखा से पैसा गया है, वही शाखा जिम्मेदार है। बैंक को दूसरी शाखा में भेजने का अधिकार नहीं है। बैंक मैनेजर को सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी दिखाएं।

क्या मैं वकील के बिना यह प्रक्रिया कर सकता हूं?

हां। पहले चार चरण (१९३० → एफआईआर → बैंक को पत्र → आरबीआई ओम्बड्समैन) वकील के बिना किए जा सकते हैं। सिर्फ पांचवें चरण (हाई कोर्ट में रीट याचिका) के लिए पंजीकृत वकील की आवश्यकता होती है।

स्कैमर ने बिटकॉइन या क्रिप्टोकरेंसी मांगी थी। क्या पैसा वापस मिल सकता है?

प्रक्रिया मुश्किल है, लेकिन असंभव नहीं है। जनवरी २०२६ से सभी क्रिप्टो एक्सचेंजों पर केवाईसी अनिवार्य कर दी गई है। समय लग सकता है: ६-१२ महीने। गुमनाम वॉलेट के मामले में पैसा वापस मिलना लगभग असंभव है।

मेरी ६५ वर्षीय मां इस स्कैम का शिकार हो गईं। मैं उनकी मदद कैसे करूं?

पहले १९३० पर कॉल करें। फिर नजदीकी साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराएं (आप अभिभावक के रूप में दर्ज करा सकते हैं)। बैंक में उनकी ओर से पत्र दें। सुप्रीम कोर्ट के फैसले में वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष त्वरित प्रक्रिया का निर्देश दिया गया है।

बैंक कह रहा है ‘पैसा वापस होने में ६ महीने लगेंगे’ — क्या यह मान्य है?

नहीं, यह पूरी तरह अवैध है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से १० दिन की बात कही है। आरबीआई ओम्बड्समैन में तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।

स्कैमर ने मेरे आधार कार्ड और पैन कार्ड की फोटो ले ली है। मुझे क्या करना चाहिए?

यह गंभीर चिंता का विषय है। स्कैमर आपके नाम पर लोन या क्रेडिट कार्ड ले सकते हैं। आप यह करें:
1. सभी चार क्रेडिट ब्यूरो (सीबिल, एक्सपेरियन, इक्विफैक्स, सीआरआईएफ) पर मुफ्त क्रेडिट फ्रीज चालू करें
2. अपने बैंक को सूचित करें कि आपकी पहचान चोरी हुई है
3. किसी भी संदिग्ध लोन या क्रेडिट कार्ड आवेदन को ब्लॉक करने के लिए अलर्ट लगाएं


आपकी एक्शन प्लान — आज क्या करें

अगर आप डिजिटल अरेस्ट स्कैम के शिकार हुए हैं:

  • इस आर्टिकल को प्रिंट करके अपने पास रखें
  • कल सुबह अपने बैंक जाएं और ऊपर दिए गए टेम्पलेट का पत्र जमा करें
  • अगर १० दिनों के भीतर पैसा नहीं मिलता है, तो सीधे आरबीआई ओम्बड्समैन में जाएं

अगर आपके किसी जानने वाले के साथ ऐसा हुआ है:

  • उन्हें यह संपूर्ण गाइड भेजें
  • उन्हें १९३० पर कॉल करने में मदद करें
  • बैंक जाने में उनके साथ जाएं

भविष्य में सुरक्षित रहने के लिए:

  • साइबर सेल के व्हाट्सएप चैनल को फॉलो करें (नंबर: ९०४०४ ४०१४०)
  • १९३० नंबर को अपने मोबाइल में सेव करें
  • फोन पर “डिजिटल अरेस्ट” की धमकी देकर कभी पैसे न भेजें। कोई भी फोन पर गिरफ्तार नहीं करता है।

शेयर करें: यह गाइड अपने माता-पिता, पड़ोसियों और रिश्तेदारों के साथ शेयर करें। डिजिटल अरेस्ट स्कैम के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार जागरूकता है।


अस्वीकरण (डिसक्लेमर)

यह आर्टिकल केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और यह कोई कानूनी सलाह नहीं है। प्रकाशन तिथि (मई २०२६) के बाद कानून, नियम और न्यायिक व्याख्याएं बदल सकती हैं। यहां वर्णित प्रक्रिया और टेम्पलेट भारत के सुप्रीम कोर्ट के फैसले W.P.(C) No. 458/2025 और आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार सटीक हैं। अपनी विशिष्ट स्थिति के लिए कानूनी सलाह लेने के लिए, कृपया भारत के बार काउंसिल में पंजीकृत किसी योग्य अधिवक्ता से परामर्श करें या उपयुक्त उपभोक्ता फोरम या अदालत में आवेदन दायर करें। लेखक और प्रकाशक इस सामग्री के आधार पर किए गए किसी भी कार्य के लिए कोई दायित्व नहीं लेते हैं।

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