हदीस कितने प्रकार की होती है और क्या-क्या हैं?

प्रकाशित: द्वारा Farhat Khan
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हदीस को विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है। स्वीकार्यता के आधार पर इसकी प्रमुख श्रेणियाँ हैं: सहीह, हसन, जईफ और मौज़ू। रावियों की संख्या के आधार पर हदीस मुतवातिर और आहाद में विभाजित होती है। इसी प्रकार सनद, मत्न और वर्णन के स्तर के अनुसार मरफू, मौकूफ, मक़्तू, मुरसल, मुअल्लक, मुनक़ति, मुदल्लस आदि अनेक प्रकार की हदीसें होती हैं।

विस्तृत व्याख्या

हदीस विज्ञान (उलूम अल-हदीस) इस्लामी ज्ञान की अत्यंत महत्वपूर्ण शाखा है। मुहद्दिसीन ने हदीसों की प्रामाणिकता, रावियों की विश्वसनीयता, सनद की निरंतरता और वर्णन की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए हदीसों को अनेक श्रेणियों में विभाजित किया है। इन वर्गीकरणों का उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि कौन-सी हदीस प्रमाण के रूप में स्वीकार्य है और कौन-सी नहीं।

1. स्वीकार्यता के आधार पर हदीस के प्रकार

सहीह हदीस

सहीह हदीस वह है जिसकी सनद निरंतर हो, सभी रावी न्यायप्रिय और मजबूत स्मरणशक्ति वाले हों तथा हदीस शाज़ और इल्लत से मुक्त हो। यह हदीस की सबसे विश्वसनीय श्रेणी है।

हसन हदीस

हसन हदीस की अधिकांश शर्तें सहीह हदीस जैसी होती हैं, लेकिन इसके रावियों की स्मरणशक्ति सहीह के रावियों से थोड़ी कम होती है। फिर भी यह स्वीकार्य और प्रमाण योग्य होती है।

जईफ हदीस

जईफ हदीस वह है जो सहीह या हसन की शर्तों को पूरा नहीं करती। इसकी सनद में कमजोरी, रावी की दुर्बलता या किसी प्रकार का विच्छेद पाया जाता है।

मौज़ू हदीस

मौज़ू हदीस मनगढ़ंत और जाली हदीस होती है जिसे पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) की ओर झूठा रूप से संबद्ध किया गया हो। यह पूर्णतः अस्वीकार्य है।

2. रावियों की संख्या के आधार पर हदीस के प्रकार

मुतवातिर हदीस

मुतवातिर हदीस वह है जिसे प्रत्येक स्तर पर इतनी बड़ी संख्या में रावियों ने वर्णित किया हो कि उनके झूठ पर एकमत होने की संभावना असंभव हो। यह निश्चित ज्ञान प्रदान करती है।

आहाद हदीस

जो हदीस मुतवातिर की शर्त पूरी नहीं करती, उसे आहाद कहा जाता है। अधिकांश हदीसें इसी श्रेणी में आती हैं।

आहाद हदीस के भी कई उपप्रकार हैं:

  • मशहूर
  • अज़ीज़
  • ग़रीब

3. वर्णन के स्तर के आधार पर हदीस के प्रकार

मरफू हदीस

वह हदीस जो सीधे पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) के कथन, कर्म, स्वीकृति या गुणों तक पहुँचती हो।

मौकूफ हदीस

वह रिवायत जो किसी सहाबी के कथन या कर्म पर समाप्त हो जाए और पैगंबर (ﷺ) तक न पहुँचे।

मक़्तू हदीस

वह रिवायत जो किसी ताबेई या ताबेई के बाद के व्यक्ति के कथन पर समाप्त हो जाए।

4. सनद की स्थिति के आधार पर हदीस के प्रकार

मुरसल हदीस

जब कोई ताबेई सीधे पैगंबर (ﷺ) से हदीस बयान करे और सहाबी का नाम छोड़ दे।

मुअल्लक हदीस

जिसकी सनद के आरंभ से एक या अधिक रावी हटा दिए गए हों।

मुनक़ति हदीस

जिसकी सनद के किसी भी भाग में एक रावी छूट गया हो।

मुअज़ल हदीस

जिसकी सनद में लगातार दो या अधिक रावी अनुपस्थित हों।

मुदल्लस हदीस

जब कोई रावी अपनी सनद की कमजोरी को छिपाने के लिए विशेष शैली का प्रयोग करे।

मुदतरिब हदीस

जब एक ही हदीस विभिन्न सनदों से विरोधाभासी रूप में वर्णित हो और किसी एक रिवायत को प्राथमिकता न दी जा सके।

5. विशेष प्रकार की हदीसें

हदीस कुदसी

वह हदीस जिसका अर्थ अल्लाह की ओर से हो, लेकिन शब्द पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) के हों। यह कुरआन से भिन्न होती है।

नबवी हदीस

पैगंबर मुहम्मद (ﷺ) के कथनों, कर्मों और स्वीकृतियों पर आधारित सामान्य हदीसें।

हदीसों का वर्गीकरण क्यों आवश्यक है?

हदीसों का वर्गीकरण कई कारणों से आवश्यक है:

  • सही और गलत रिवायतों में अंतर करने के लिए।
  • इस्लामी कानून और फ़िक़्ह की सही समझ विकसित करने के लिए।
  • पैगंबर (ﷺ) पर झूठे आरोपों से सुरक्षा के लिए।
  • धार्मिक ज्ञान की शुद्धता बनाए रखने के लिए।
  • प्रमाण योग्य और अप्रमाणित हदीसों की पहचान के लिए।

विद्वानों की राय

इमाम इब्न हजर असकलानी (रह.)

इमाम इब्न हजर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक नुखबतुल फ़िकर में हदीसों के विभिन्न प्रकारों और उनके नियमों की विस्तृत चर्चा की है।

इमाम सुयूती (रह.)

इमाम सुयूती ने तद्रीब अल-रावी में हदीस विज्ञान की अनेक शाखाओं और वर्गीकरणों को विस्तार से समझाया है।

इमाम नववी (रह.)

इमाम नववी ने हदीस की श्रेणियों को समझना प्रत्येक गंभीर विद्यार्थी के लिए आवश्यक बताया है।

आम गलतफहमियाँ

गलतफहमी: हदीस केवल दो प्रकार की होती है – सहीह और जईफ।

सही उत्तर: हदीस के अनेक वर्गीकरण हैं। सहीह, हसन, जईफ, मौज़ू, मुतवातिर, आहाद, मरफू, मौकूफ आदि सभी अलग-अलग श्रेणियाँ हैं।

गलतफहमी: हर जईफ हदीस मौज़ू होती है।

सही उत्तर: जईफ हदीस केवल कमजोर होती है, जबकि मौज़ू हदीस पूरी तरह मनगढ़ंत और जाली होती है।

गलतफहमी: मुरसल हदीस हमेशा अस्वीकार्य होती है।

सही उत्तर: कुछ विद्वानों ने विशेष शर्तों के साथ मुरसल हदीस को स्वीकार किया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हदीस की सबसे प्रामाणिक श्रेणी कौन-सी है?

सहीह हदीस हदीस की सबसे विश्वसनीय और प्रामाणिक श्रेणी मानी जाती है।

मुतवातिर और आहाद हदीस में क्या अंतर है?

मुतवातिर हदीस बहुत बड़ी संख्या में रावियों द्वारा वर्णित होती है और निश्चित ज्ञान प्रदान करती है, जबकि आहाद हदीस सीमित संख्या में रावियों द्वारा वर्णित होती है।

मरफू और मौकूफ हदीस में क्या अंतर है?

मरफू हदीस पैगंबर (ﷺ) तक पहुँचती है, जबकि मौकूफ हदीस सहाबी के कथन या कर्म पर समाप्त हो जाती है।

हदीस कुदसी और कुरआन में क्या अंतर है?

कुरआन के शब्द और अर्थ दोनों अल्लाह की ओर से हैं, जबकि हदीस कुदसी का अर्थ अल्लाह की ओर से और शब्द पैगंबर (ﷺ) के होते हैं।

क्या सभी हदीसें समान स्तर की होती हैं?

नहीं। हदीसों के अलग-अलग स्तर होते हैं, जैसे सहीह, हसन, जईफ और मौज़ू, जिनकी विश्वसनीयता भी अलग-अलग होती है।

निष्कर्ष

हदीस के प्रकारों का ज्ञान हदीस विज्ञान को समझने की मूल कुंजी है। मुहद्दिसीन ने अत्यंत सावधानी और शोध के माध्यम से हदीसों को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित किया ताकि इस्लामी शिक्षाओं की शुद्धता बनी रहे। सहीह, हसन, जईफ, मौज़ू, मुतवातिर, आहाद और अन्य प्रकारों को समझकर ही हदीसों का सही मूल्यांकन किया जा सकता है और इस्लाम की शिक्षाओं को सही रूप में अपनाया जा सकता है।

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Farhat Khan

फरहात खान एक समर्पित इस्लामी लेखक और शोधकर्ता हैं, जो मुख्य रूप से उलूमुल कुरान (तफसीर), हदीस और शुद्ध अकीदा पर काम करते हैं। प्रामाणिक इस्लामी ज्ञान को सही स्रोतों के साथ सरल भाषा में प्रस्तुत करना उनका मुख्य उद्देश्य है।

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